'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

बिखरे हिमखंड / वीरेन्द्र आस्तिक

तितर-बितर कर दिए गए हो
सोचो फिर जुड़ाव की।


दल-संस्कृति से मिला तुम्हें क्या
कबीलियाई खून-खराबा
टूटा ध्वज, तिलक, टोपियों के-
बल पर कुछ बनने का दवा

खाली सिर हो गए बोझ से
सोचो फिर भराव की।

जाति आदमी, धर्म आदमी
क्या ये दर्शन नाकाफी है
क्या नहीं दूसरी आज़ादी-
के लिए बात बुनियादी है

बिखर गए हिमखंडों! सोचो
मिलकर फिर बहाव की।



[श्रेणी : नवगीत । वीरेंद्र आस्तिक]