'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

सब के सब धूमिल / वीरेंद्र आस्तिक

दर्पण
सब के सब धूमिल


औंधे मुंह सूरज के हांथों
क़त्ल हुई प्रतिभाएं
कोइ सूरत क्या देखे
सब बिम्बहीन गंगाएं

ताने हुए थे इन्द्रधनुष
बिखर गए कुहरिल-कुहरिल

न्यायों की मृगतृष्णा के
प्यासे
वादी, प्रतिवादी
बंदूकों की छाया में
ऊबे-ऊबे अपराधी

तथाकथित रामों की
गुहराएँ
आज के अजामिल

भीड़ों में रस्ते खोये
अनजानों में पहचानें
खुद की तलाश में
बार-बार
आतीं एक ठिकाने

पंथ-प्रदर्शक
मिलते हैं
जेबों में डाले मंजिल


[श्रेणी : नवगीत । वीरेंद्र आस्तिक]