'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

नए नमूने / दिनेश सिंह

कई रंग के फूल बने
काँटे खिल के
नई नस्ल के नये नमूने
बेदिल के


आड़ी-तिरछी
टेढ़ी चालें
पहने नई-नई सब खालें

परत-दर-परत हैं
पँखुरियों के छिलके

फूले नये-
नये मिजाज में
एक अकेले के समाज में

मेले में
अरघान मचाए हैं पिलके

भीतर-भीतर
ठनाठनी है
नोंक-झोंक है, तनातनी है

एक शाख पर
झूला करते
हिलमिल के

व्यर्थ लगें अब
फूल पुराने
हल्की ख़ुशबू के दीवाने

मन में लहका करते थे
हर महफिल के

[श्रेणी : नवगीत । दिनेश सिंह