'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

एक मुश्किल दौर में / उमाशंकर तिवारी

चैन उडा़ती रातें आईं
धूल उडा़ते दिन आए हैं।
सीधी राह गुज़रना मुश्किल
ऐसे दौर कठिन आए हैं।


सुख की नींद हमें भी मिलती
जो ख़ुद हम नादान न होते
काश, छ्तों को आँखें होतीं,
दीवारों के कान न होते
फिर भी पूरब की खिड़की से
क्या उजियारे बिन आए हैं?

बेमानी हैं नाते-रिश्ते
पास-पड़ोस असलहों वाले
आँखें जख़्मी, सपने घायल
और जबानों पर हैं ताले
घर के लोग सयाने कितने
हम उँगली पर गिन आए हैं।

हम ऐसे राजा के बेटे
जिनके लिए मॄगदाव लिखा है
एक अदद लम्बा निर्वासन
कुनबे का बिखराव लिखा है
फिर भी बन-बन भटकाने को
जब-तब हेम हिरन आए हैं।



[ श्रेणी : नवगीत । उमाशंकर तिवारी ]