'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

मछलियाँ / दिनेश सिंह

ताल से डरती मछलियाँ
जाल से डरती नहीं हैं


तडफड़ाती यों-
मछेरे लोच पर कुर्बान जाएँ
मुटि्‌ठयों में फिसलतीं
उद्‌दाम बलखाती अदाएँ

स्वाद उनका जान लें सब
साँस भी भरती नहीं है

उछलकर गहराइयों से
कश्तियों पर आ गिरी जो
मौत के आगोश में खुश हैं
सनक तक सिरफिरी जो

जहन्नुम के बगीचे में
घास भी चरती नहीं है

खंड-खंड कड़ाहियों में
यहाँ जाएँ-वहाँ जाएँ
खदबदाती, उबलती हैं
सुर्खरू होकर शिराएँ

शोरबे की 'प्लेट' में हैं
तनिक उफ़्फ़ करती नहीं हैं


[श्रेणी : नवगीत । दिनेश सिंह]