'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

तबियत / वीरेंद्र आस्तिक

जो अपनी तबियत को
बदल नहीं सकते
हम ऐसे शब्दों को

जीकर क्या करते

नये सूर्य को मिलते हैं
फूटे दर्पण
नये-नये पांवों को-
गड़े कील से
मन

ध्वस्त लकीरों के बाहर
आते डरते
हम ऐसे शब्दों को
जीकर क्या करते

कोल्हू से अर्थों में
बार-बार घूमे
बंधे-बंधे मिथकों से
खुलकर क्या झूमे

आत्म-मुग्ध होकर
अपने को ही छलते
हम ऐसे शब्दों को
जीकर क्या करते

कभी नए बिम्बों का
बादल तो बरसे
अपने हाथ बुनी नीड़ों का
मन तरसे

साहस मार-मार कर
लीकों पर चलते



[श्रेणी : नवगीत । वीरेंद्र आस्तिक]