'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

लाल चन्दन है / ठाकुरप्रसाद सिंह

मेरे घर के पीछे चन्दन है,
लाल चन्दन है।

तुम ऊपर टोले के
मैं निचले गाँव की
राहें बन जाती हैं रे
कड़ियाँ पाँव की,

समझो कितना
मेरे प्राणों पर बन्धन है।
आ जाना वन्दन है-
लाल चन्दन है।


[श्रेणी : नवगीत । ठाकुरप्रसाद सिंह ]