'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

हम तो एक किनारे भर हैं / वीरेंद्र आस्तिक

हम ज़मीन पर ही रहते हैं
अम्बर पास चला आता है 


अपने आस-पास की सुविधा
अपना सोना अपनी चांदी
चाँद-सितारों जैसे बंधन
और चांदनी-सी आजादी

हम शबनम में भींगे होते
दिनकर पास चला आता है

हम न हिमालय की ऊंचाई
नहीं मील के हम पत्थर हैं
अपनी छाया के बाढ़े हम
जैसे भी हैं हम सुन्दर हैं

हम तो एक किनारे भर हैं
सागर पास चला आता है
अपनी बातचीत रामायण 
अपने काम-धाम वृन्दावन
दो कौड़ी का लगा सभी कुछ
जब-जब रूठ गया अपनापन

हम तो खाली मंदिर भर हैं
ईश्वर पास चला आता है।


[श्रेणी : नवगीत । वीरेंद्र आस्तिक]