'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

होश में आए / वीरेंद्र आस्तिक

नींद में हम
प्रार्थनाएं कर गए
होश में आए

ठगे-से रह गए

भाषणों में सार्थक
शब्द कुछ जोड़े नहीं
उठ पड़े कुछ प्रश्न तो
मौन थे ओढ़े वही

शून्य-शिखरों की
सभाएं कर गए
होश में आए
ठगे-से रह गए

मूर्तियों-से शब्द हैं
कौन खोले अर्थ को
कुछ तिलक कुछ पोथियाँ
रट रहीं हैं व्यर्थ को

सत्यनारायण
कथाएँ कर गए
होश में आए
ठगे-से रह गए

हम हिमालय पर चढ़े
हाथ खाली आ गए
तीर्थ निकले रेत के
साथ सब भटका गए

छाँइयों की परिक्रमाएँ-
कर गए
होश में आए
ठगे-से रह गए


[श्रेणी : नवगीत । वीरेंद्र आस्तिक]