'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

नदी / लीलाधर मंडलोई

लाख कोशिश की
कि चल जाए
दवाइयों का जादू
सेवा से हो जाएं ठीक

नहीं हुआ चमत्‍कार लेकिन

मां की आंखें
उस गंगाजली पर थीं

जिसे भर लाई थीं वे
अपनी पिछली यात्रा में

धर्म में रहा हो उनका विश्‍वास
ऐसा देखा नहीं

वे बचे-खुचे दिनों में
रखे रहीं उस कुदाल को

जिससे तोड़ा उन्‍होंने कोयला
पच्‍चीस बरस तक काली अंधेरी खानों में

मां जल से उगी हैं
नदी को वे मां समझती थीं।


[ श्रेणी : कविता । लीलाधर मंडलोई ]