'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

एकलव्य से संवाद-4 / अनुज लुगुन

हवा के हल्के झोकों से
हिल पत्तों की दरार से
तुमने देख लिया था मदरा मुण्डा
झुरमुटों में छिपे बाघ को
और हवा के गुज़र जाने के बाद
पत्तों की पुन: स्थिति से पहले ही
उस दरार से गुज़रे
तुम्हारी सधे तीर ने
बाघ का शिकार किया था
और तुम हुर्रा उठे थे--
'जोवार सिकारी बोंगा जोवार !’[1]
तुम्हारे शिकार को देख
एदेल और उनकी सहेलियाँ
हँडिय़ा का रस तैयार करते हुए
आज भी गाती हैं तुम्हारे स्वागत में गीत
'सेन्देरा कोड़ा को कपि जिलिब-जिलिबा ।‘[2]
तब भी तुम्हारे हाथों धनुष
ऐसे ही तनी थी।

शब्दार्थ:
↑ वंशावली
↑ मुण्डा लोग अपने पूर्वजों के नाम पत्थर पर खोदते हैं

[ श्रेणी : कविता। लेखक : अनुज लगुन ]