'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

चुने हुए अवधी लोकगीत

सोहर
  • सोहर / अवधी
  • रामलला नहछू / तुलसीदास
  • द्वारे से राजा आए, मुस्की छांटत आए / अवधी
  • चैत मास तिथि नौमी, त रामा जग्य रोपन्ही रे / अवधी
  • बंसी तो बाजी मेरे रंग-महल में / अवधी
देवी गीत
  • देवी गीत-देबी अंगन मोरे आयीं / अवधी
  • देवी गीत-लगत चईत महिनवा देबी जी / अवधी
  • देवी गीत-सेरों पे होके सवार महरानी / अवधी
  • देवी गीत-देबी दयाल भईं अंगन मोरे / अवधी
  • देवी गीत- देबी दयाल भईं अंगन मोरे / अवधी
विवाह गीत
  • विवाह निमंत्रण गीत - अरे अरे करा भवरवा / अवधी
  • विवाह -गीत - घुमची बरन मै सुन्नर / अवधी
  • विवाह -गीत - मोरे पिछवरवाँ लौंगा कै पेड़वा / अवधी
  • विवाह - गीत - बेरिया की बेरिया मै / अवधी
  • विवाह - गीत - बाबा जे बेटी बुलावें / अवधी
  • विवाह -गीत - मोरे पिछवरवाँ धन बसियरिया / अवधी
  • विवाह -गीत - मोरे अंगनवा चनन गछरुख्वा / अवधी
  • विवाह -गीत - सोवत रहीं अटरिया झझक / अवधी
  • तिलक -गीत भितरा से बोलीं हैं / अवधी
  • कंहवा कै यह माती हथिनिया / अवधी
  • अबहीं बारी है हमारी उमिरिया बाबा / अवधी
सावन गीत
  • सावन / अवधी
  • केही केरे सिर सोहे सोने क छतुरिया / अवधी
  • हिंडोला कुँज वन डालो झूलन आईं राधिका प्यारी / अवधी
नकटा
  • लागा झुलानिया प धक्का / अवधी
  • मैं तोर गुन जानि गयूँ ए नान गुटकी / अवधी
  • तुम मोरी बात बिगाड्यो बारे रसिया / अवधी
  • हमसे खिंचत न गगरिया कमर मोरी छल्ला मुन्दरिया / अवधी
  • पटना से बैदा बोलाई द्या नजरा गैली गोरिया / अवधी
जाँत गीत
  • कब चुकबे, कब चुकबे चलनी कै गोंहुआँ हो न / अवधी
विदाई गीत
  • विदाई गीत एक बन गईं दुसरे बन / अवधी
  • बिदाई गीत / अवधी
  • मोह न छोड्यो मोर महतारी / अवधी
रोटी गीत
  • की हे जी, हाथे मा लोटिया बगल मा धोतिया / अवधी
निर्गुण
  • ससुरे परलोक क चुनरी नैहरवा संसार धूमिल भई / अवधी
फाग
  • दै दै मुरलिया मोरी राधिका / अवधी 
  • अन्य गीत 
  • चैती / अवधी 
  • बारामासी / अवधी 
  • बिरहा / अवधी 
  • पैसा ऐसी चीज राजा घरै नहीं आवैं / अवधी 
  • मैं अलबेली गुदाय आई गुदना / अवधी 
  • सरौता कहाँ भूलि आये प्यारे नन्दोइय़ा / अवधी 
  • जल भर ले हिलोरें हिलोर रसरिया रेशम की / अवधी

सोहर
सोहर

चलो चली सखिया सहेलिया त हिलि मिलि सब चली हो
सखी जमुना का निर्मल नीर कलस भरि लाई हो

कोउ सखी हाथ मुख धोवें त कोउ सखी घैला बोरै हो
अरे जसुदा जी ठाढ़ी ओनावै कन्हैया कतौ रोवें हो

घैला त धरिन घिनूची पर गेडुरी तखत पर हो
जसुदा झपटि के चढ़ी महलिया कन्हैया कहाँ रोवै हो

चलो चली सखिया सहेलिया त हिलि मिलि सब चली हो
सखी जसुदा के बिछुड़े कन्हैया उन्हें समुझैबे हो

कई लियो तेलवा फुलेलवा आँखिन केरा कजरा हो
जसुदा कई लियो सोरहो सिंगार कन्हैया जानो नहीं भये हो

नीर बहे दूनो नैन दुनहु थन दूधा बहे हो
सखी भीजै चुनरिया का टोक मैं कैसे जानू नहीं भये हो


साभार: सिद्धार्थ सिंह 

रामलला नहछू 

रचनाकार : तुलसीदास

आदि सारदा गनपति गौरि मनाइय हो।
रामलला कर नहछू गाइ सुनाइय हो।।
जेहि गाये सिधि होय परम निधि पाइय हो।
कोटि जनम कर पातक दूरि सो जाइय हो ।।१।।

कोटिन्ह बाजन बाजहिं दसरथ के गृह हो ।
देवलोक सब देखहिं आनँद अति हिय हो।।
नगर सोहावन लागत बरनि न जातै हो।
कौसल्या के हर्ष न हृदय समातै हो ।।२।।

आले हि बाँस के माँड़व मनिगन पूरन हो।
मोतिन्ह झालरि लागि चहूँ दिसि झूलन हो।।
गंगाजल कर कलस तौ तुरित मँगाइय हो।
जुवतिन्ह मंगल गाइ राम अन्हवाइय हो ।।३।।

गजमुकुता हीरामनि चौक पुराइय हो।
देइ सुअरघ राम कहँ लेइ बैठाइय हो।।
कनकखंभ चहुँ ओर मध्य सिंहासन हो।
मानिकदीप बराय बैठि तेहि आसन हो ।।४।।

बनि बनि आवति नारि जानि गृह मायन हो।
बिहँसत आउ लोहारिनि हाथ बरायन हो।।
अहिरिनि हाथ दहेड़ि सगुन लेइ आवइ हो।
उनरत जोबनु देखि नृपति मन भावइ हो ।।५।।

रूपसलोनि तँबोलिनि बीरा हाथहि हो।
जाकी ओर बिलोकहि मन तेहि साथहि हो।।
दरजिनि गोरे गात लिहे कर जोरा हो।
केसरि परम लगाइ सुगंधन बोरा हो ।।६।।

मोचिनि बदन-सकोचिनि हीरा माँगन हो।
पनहि लिहे कर सोभित सुंदर आँगन हो।।
बतिया कै सुधरि मलिनिया सुंदर गातहि हो।
कनक रतनमनि मौरा लिहे मुसुकातहि हो।।७।।

कटि कै छीन बरिनिआँ छाता पानिहि हो।
चंद्रबदनि मृगलोचनि सब रसखानिहि हो।।
नैन विसाल नउनियाँ भौं चमकावइ हो।
देइ गारी रनिवासहि प्रमुदित गावइ हो ।।८।।

कौसल्या की जेठि दीन्ह अनुसासन हो।
``नहछू जाइ करावहु बैठि सिंहासन हो।।
गोद लिहे कौसल्या बैठी रामहि बर हो।
सोभित दूलह राम सीस पर आँचर हो ।।९।।

नाउनि अति गुनखानि तौ बेगि बोलाई हो।
करि सिँगार अति लोन तो बिहसति आई हो।।
कनक-चुनिन सों लसित नहरनी लिये कर हो।
आनँद हिय न समाइ देखि रामहि बर हो ।।१०।।

काने कनक तरीवन, बेसरि सोहइ हो।
गजमुकुता कर हार कंठमनि मोहइ हो।।
कर कंचन, कटि किंकिन, नूपुर बाजइ हो।
रानी कै दीन्हीं सारी तौ अधिक बिराजइ हो ।।११।।

काहे रामजिउ साँवर, लछिमन गोर हो।
कीदहुँ रानि कौसलहि परिगा भोर हो।।
राम अहहिं दसरथ कै लछिमन आन क हो।
भरत सत्रुहन भाइ तौ श्रीरघुनाथ क हो ।।१२।।

आजु अवधपुर आनँद नहछू राम क हो।
चलहू नयन भरि देखिय सोभा धाम क हो।।
अति बड़भाग नउनियाँ छुऐ नख हाथ सों हों
नैनन्ह करति गुमान तौ श्रीरघुनाथ सों हो ।।१३।।

जो पगु नाउनि धोवइ राम धोवावइँ हो।
सो पगधूरि सिद्ध मुनि दरसन पावइ हो।।
अतिसय पुहुप क माल राम-उर सोहइ हो।।
तिरछी चितिवनि आनँद मुनिमुख जोहइ हो ।।१४।।

नख काटत मुसुकाहिं बरनि नहिं जातहि हो।
पदुम-पराग-मनिमानहुँ कोमल गातहि हो।।
जावक रचि क अँगुरियन्ह मृदुल सुठारी हो।
प्रभू कर चरन पछालि तौ अनि सुकुमारी हो ।।१५।।

भइ निवछावरि बहु बिधि जो जस लायक हो ।
तुलसिदास बलि जाउँ देखि रघुनायक हो।।
राजन दीन्हे हाथी, रानिन्ह हार हो।
भरि गे रतनपदारथ सूप हजार हो ।।१६।।

भरि गाड़ी निवछावरि नाऊ लेइ आवइ हो।
परिजन करहिं निहाल असीसत आवइ हो।।
तापर करहिं सुमौज बहुत दुख खोवहिँ हो।
होइ सुखी सब लोग अधिक सुख सोवहिं हो ।।१७।।

गावहिं सब रनिवास देहिं प्रभु गारी हो।
रामलला सकुचाहिं देखि महतारी हो।।
हिलिमिलि करत सवाँग सभा रसकेलि हो। 
नाउनि मन हरषाइ सुगंधन मेलि हो ।।१८।।

दूलह कै महतारि देखि मन हरषइ हो।
कोटिन्ह दीन्हेउ दान मेघ जनु बरखइ हो।।
रामलला कर नहछू अति सुख गाइय हो।
जेहि गाये सिधि होइ परम निधि पाइय हो ।।१९।।

दसरथ राउ सिंहसान बैठि बिराजहिं हो।
तुलसिदास बलि जाहि देखि रघुराजहि हो।।
जे यह नहछू गावैं गाइ सुनावइँ हो।
ऋद्धि सिद्धि कल्यान मुक्ति नर पावइँ हो ।।२०।।

द्वारे से राजा आए, मुस्की छांटत आए

द्वारे से राजा आए, मुस्की छांटत आए, बिरवा कूचत आए हो 
रानी अब तोरे दिन नागिचाने, बहिनिया का आनी लावों हो 

हमरे अड़ोस हवे, हमरे पड़ोस हवे, बूढी अईया घरही बाटे हो, 
राजा तुम दुई भौरा लगायो त वहे हम खाई लेबै, ननदी का काम नहीं हो 

हम तो सोचेन राजा हाट गे हैं, हाट से बजार गें हैं हो 
राजा गएँ बैरिनिया के देस, त हम्मै बगदाय गए हो 

छानी छपरा तूरे डारें, बर्तन भडुआ फोरे डारें,बूढा का ठेर्राय डारे हो 
बहिनी आए रही बैरन हमारी, त पर्दा उड़त हवे हो 

अंग अंग मोरा बांधो, त गरुए ओढाओ, काने रुइया ठूसी दियो हो,
बहिनी हमरे त आवे जूडी ताप, ननदिया का नाम सुनी हो 

अपना त अपना आइहैं, सोलह ठाईं लरिका लैहै,घर बन चुनी लैहैं,
कुआँ पर पंचाईत करिहैं हो 
बहिनी यह घर घलिनी ननदिया त हमका उजाड़ी जाई हो...

चैत मास तिथि नौमी, त रामा जग्य रोपन्ही रे

चैत मास तिथि नौमी, त रामा जग्य रोपन्ही रे 
अरे बिनु सितला जज्ञि सून, त को जज्ञि देखै रे 

सोने के खडउन्हा बशिष्ट धरे, सभवा अरज करैं रे 
रामा सीता का लाओ बोलाई, त को जज्ञि देखै रे 

अगवां के घोड़वा बसिष्ठ मुनि, पिछवां के लछिमन रे 
दुइनो हेरैं लागे ऋषि के मड़ईयाँ, जहां सीता ताप करैं रे 

नहाई धोई सीता ठाढ़ी भई, झरोखन चित गवा रे 
ऋषि आवत गुरु जी हमार, औ लछिमन देवर रे 

गंगा से जल भर लाइन, औ थार परोसें रे 
सीता गुरु जी के चरण पखारें, त माथे लगावैं रे 

इतनी अकिल सीता तुम्हरे, जो सब गुन आगरि रे 
सीता अस के तज्यो अजोध्या, लौटि नहि चितयू रे 

काह कहौं मैं गुरु जी, कहत दुःख लागे सुनत दुःख लागे रे 
गुरु इतनी सांसत रामा डारैं, की सपन्यो न आवैं रे 
ऐसा त्याग किया राम ने मेरा की सपने में भी नहीं आते

सुधि करैं रामा वही दिनवां, की जौने दिना ब्याह करैं रे 
रामा अस्सी मन केरा धनुस, त निहुरी उठावैं रे 

सुधि करैं रामा वही दिनवां, की जौने दिना गौना लायें रे 
रामा फुल्वन सेजिया सजावें, हिरदय मा लई के स्वावै रे 

सुधि करैं रामा वही दिनवां, की जौने दिना बन चले रे 
रामा हमका लिहिन संग साथ, साथ नहीं छोडें रे

सवना भादौना क रतिया, मैं गरुए गरभ से रे 
गुरु ऊई रामा घर से निकारें, लौटि नहीं चितवहि रे? 

गुरु जी का कहना न मेटबे, पैग दस चलबे रे 
गुरु फाटै जो धरती समाबे, अजोध्या नहीं जाबै रे 
गुरु फेर हियें चली औबे, राम नहीं देखबै रे

साभार: सिद्धार्थ सिंह

बंसी तो बाजी मेरे रंग-महल में

बंसी तो बाजी मेरे रंग-महल में 

सासू जो ऐहैं राजा चढ़वा चढ़न को,
उनहूँ को नेग दे देना मोरे अच्छे राजा,
उनहूँ को नेग दे देना मोरे भोले राजा,
मोती से उजले राजा,
फूलों से हलके राजा,
तारों से पतले राजा,
नैनों से नैन मिलाना ,
मुखड़े से हँस बतलाना,
रंग-महल में । 

जिठनी जो अइहैं राजा, पिपरी पिसन को… 
ननदी जो अइहैं राजा छठिया धरन को…
देवर जो अइहैं राजा बंसी बजन को

देवी गीत
देबी अंगन मोरे आयीं 

देबी अंगन मोरे आयीं निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ 
काऊ देखि देबी मगन भईं हैं काऊ देखि मुस्कानी 
निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ
सेनुर देख देबी मगन भईं हैं बिंदिया देख मुस्कानी
निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ
चूडिया देख देबी मगन भईं हैं कंगना देखि मुस्कानी
निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ
लहंगा देखि देबी मगन भईं हैं चुनरी देखि मुस्कानी
निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ 
पायल देखि देबी मगन भईं हैं बिछिया देखि मुस्कानी
निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ 
रानी देखि देबी मगन भईं हैं बालक देखि मुस्कानी
निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ
देबी अंगन मोरे आयीं निहुरी कै मै पईयाँ लागूँ

लगत चईत महिनवा देबी जी

लगत चईत महिनवा देबी जी आई गईं भवनवा 
मईया के मागिय में लाल लाल सिंदुरवा 
चमचम चमके टिकुलिया 
देबी जी आई गईं भवनवा 
मईया के हथवा में लाल लाल चुडिया 
चमचम चमके कंगनवा 
देबी जी आई गईं भवनवा 
मईया के अंगे लहंगा सोहेv 
चमचम चमके चुनरिया 
देबी जी आई गईं भवनवा 
मईया के पैरों में पायल सोहे 
चमचम चमके बिछुववा 
देबी जी आई गईं भवनवा

सेरों पे होके सवार महरानी

सेरों पे होके सवार महरानी 

मेरे घरवा आइन महरानी 
निबिया के तरे तरे आयीं महरानी
अब निबिया झपसन लाग महरानी 
अमवा के तरे तरे आइन महरानी 
अब अमवा बौरन लाग महरानी 
तलवा के तीरे तीरे आयीं महरानी
अब तलवा लहरान लाग महरानी 
महलों के तरे तरे आयीं महरानी 
अब रानिय गर्भन लाग महरानी

देबी दयाल भईं अंगन मोरे

देबी दयाल भईं अंगन मोरे होय निसरी 

मईया के अँखियाँ आमे कै फकियाँ 
भौहें कमान तनी अंगन मोरे होय निसरी 
मईया कै दतवा अनारे कै दाना 
जिभिया कमल की कलि अंगन मोरे होय निसरी 
मईया कै गलवा में मुंडों की माला 
हथवा कमल की कलि अंगन मोरे होय निसरी 
मैया के हथवा में लौंगा कै डरिया 
मोरे बेदिया पै धै निसरी अंगन मोरे होय निसरी

देबी दयाल भईं अंगन मोरे

होलिया में उड़त है गुलाल मईया का रंग सतरंगी 

सेनुरा भीजै बिंदिया भीजै चेहरा है ललाम लाल 
मईया का रंग सतरंगी 
चुडिया भीजै कंगना भीजै हाथ है ललाम लाल 
मईया का रंग सतरंगी 
लहंगा भीजै चुनरी भीजै देहियाँ है ललाम लाल 
मईया का रंग सतरंगी 
पायल भीजै बिछुआ भीजै एड़िया है ललाम लाल 
गुलाल मईया का रंग सतरंगी

विवाह गीत
अरे अरे करा भवरवा 

अरे अरे करा भवरवा करिया तोहरी जतिया
भवरा आजु मेरे काज परोजन नेवत दई आओ
अरगन नेवत्यो परगन नेवत्यो अउर नानियाउर
एक नहीं नेवत्यो बीरन भईया जेन्से बैर भये
सास भेटै आपन भईया नन्दा बीरन भईया अरे बाजरा कै
फाटै हमरी छतिया कही उठी भेटू अपने बीरन बिनु 
अरे अरे करा भवरवा करिया तोहरी जतिया
भौरा फिर से नेवत्य दै आओ बीरन मोरे आवें

घुमची बरन मै सुन्नर

घुमची बरन मै सुन्नर बाबा मुनरी बरन करिहांव

हमरे बरन बर ढुंढयो मेरे बाबा तब मोरा रचहू बियाह 
इहड़ खोज्यो बेटी बीहड़ खोज्यो,खोज्यों मै देस सरिवार
तोहरे जोगे बेटी बर कतहूँ न पायों अब बेटी रह्हू कुवाँरि
इहड़ खोज्यो बाबा बीहड़ खोज्यो,खोज्यों तू देस सरिवार
चार परगिया पै नग्र अयोध्या दुइ बर राम कुवाँर
उहे बर माँगै बेटी अन धन सोनवा बारह बरद धेनू गाय 
उहे बर माँगै बेटी नव लाख दायज हथिनी दुवारे कै चार 
नहीं देबो मोरे बाबा अन धन सोनवा बारह बरद धेनू गाय 
नहीं देबो मोरे बाबा नव लाख दायज तब बर हेरौ हरवाह

मोरे पिछवरवाँ लौंगा कै पेड़वा

मोरे पिछवरवाँ लौंगा कै पेड़वा लौंगा चुवै आधी रात

लौंगा मै चुन बिन ढेरिया लगायों लादी चले हैं बनिजार 
लड़ चले हैं बनिजरवा बेटौवा लादि चले पिय मोर 
हमरो डरिया फनावो बंजरवा हमहूँ चालब तोहरे साथ 
भुखियन मरिबू पियासियन मरबू पान बिन होठ कुम्हिलाय 
कुश कै गडरिया धना डासन पैइबू अंग छोलय छिल जाये 
भुखिया अंगैबै पियसिया अंगैबै पनवा जो देबै बिसराय
तोहरे संघरिया प्रभु जोगिन होबै न संग माई न बाप

बेरिया की बेरिया मै

बेरिया की बेरिया मै बरिज्यो बाबा जेठ जनि रचिहो बियाह 
हठी से घोडा पियासन मरिहै गोरा बदन कुम्हलाय
कहो तो मोरी बेटी छ्त्रू छ्वाओं कहो तो नेतवा ओहार
कहो तो मोरी बेटी सुरजू अलोपों गोरा बदन रहि जाय 
काहे को मोरे बाबा छ्त्रू छ्वायो काहे कैं नेतवा ओहार
काहे को मोरे बाबा सुरजू अलोपों गोरा बदन रहि जाय 
आजू कै रोजे बाबा तोहरी मडैइया कालही सुघर बार के साथ 
काचहि दुधवा पियायो मोरी बेटी दहिया खियायो सढीयार 
एकहू गुनहिया न लाइयु मोरी बेटी चल्यु परदेसिया के साथ
काहे कै मोरे बाबा दुधवा पियायो दहिया खियायो सढीयार 
जानत रह्यो बेटी पर घर जइहें गोरा बदन रहि जाय 
इहै दुधवा बाबा भैया कैं पीऔत्यों जेनि तोहरे दल कै सिंगार

बाबा जे बेटी बुलावें

बाबा जे बेटी बुलावें जांघ बैठावे 
बेटी कौन कौन सुख पायु महसे कहो अर्थाये 
सोने के कटोरवा बाबा हमरा भोजँव दुधवा हमरा अस्नान 
सोने की पलंगिया बाबा हमरी सेजरिया भुईया मै लोटहूँ अकेल 
उसर जोत बेटी काकर बोयों न जान्यो तित की मीठ
नगर पैईठ बेटी तोरा बार दूँढयों नहि जान्यो करमा तोहर

मोरे पिछवरवाँ धन बसियरिया

मोरे पिछवरवाँ धन बसियरिया 
गलियाँ फिरही श्री राम रे 
अस कोऊ नाही रे नगर अयोध्या राम पियासन जांये
भीतर से निकरी हैं सीता रानियवाँ हथवा गेडुवा जुड़ पानि
बैइठो न राम हो ऊँचे चबूतरा पियहु गेडुआ जुड़ पानि 
केकर हौ तुन्ह बरी दुलारी केकर करिना कुआँर
केकरे घरा तू बेही बटुयु केकरि करिना कुआरि
रजा जनक कै बरी दुलारी उन्ही कै करिना कुआरि
राजा दसरथ घरा बेही बाटी राम कै होई बहुआरि
यतना बचन सुने राम से लक्षमन गलियाँ में हेरहिं कहार
अरे अरे कन्हरा भईया सोने कै डोलिया सजाओ मोरे भईया सीता अवध पहुचाओ 
यतना बचन सुनी सीता रनिवा गलियाँ में छोड़हीन भोकार
अस कोयू नाही नगर अयोध्या राम मिले ठगहार

मोरे अंगनवा चनन गछरुख्वा

मोरे अंगनवा चनन गछरुख्वा अरे अछन बिछन होई गै डारि 
तेहितर दुल्हे रामा घोडा दौरावैं अरे अरुझय दुल्हे रामा सिरपाग 
अब कहाँ बाटियु पाणे (जो नाम चाहे लगा सकते हैं ) 
रामा धेरिया,पाडे रामा नतिनी अरे आई के छोडावौ सिरपाग 
कैइसे कै आओं पाडे रामा पुतवा अरे पाडे रामा नतिया मोरा बाबा मडउवा में ठाढ 
तब न लजानुयु पाडे रामा धेरिया पाड़ेहू रामा नतिनी जब रह्ल्यू बगलिया में ठाढ़ी
तब न लजानयौ पाडेह रामा पुतवा पादेह रामा नतिया मोरा बाबा जे देथै करिना दान

सोवत रहीं अटरिया झझक

सोवत रहीं अटरिया झझक उठ बैठीं 

मईया केकरे दुआरे बाजन बाजे केकर होत है बियाह 
मईया जे बेटी बुलावैं गोद बैईठावें 
हसि कै बोलैं बेटी तोहरे दुआरियां बाजन बाजे तुहरहि होत है बियाह 
नाही सीख्यौ मोरी मईया गुन ग्रस्थापन नाही सीख्यौ राम रसोय 
सास ननद मोरा भैया गरियैहैं मोरे बूते सहयू न जाय
सिख लेहू मोरी बेटी गुन ग्रस्थापन सिख लेहू राम रसोय 
सास ननद तोहरी भैया गरियहियें ले लिहो अचरा पसार

गीत भितरा से बोलीं हैं

भितरा से बोलीं हैं रानी कौशिल्या सुनो राजा दशरथ बचनी हमारी 
सगरी अजोध्या में राम दुलरुआ तिलक आई बडि थोरी 
सोभ्वा से बोले है राजा दशरथ सुनो जनक बचनी हमारी 
सगरी अजोध्या में राम दुलरुआ तिलक आई बड़ी थोरी 
हाथ जोरी राजा जनक जी बिनवैं सुनो दशरथ बचनि हमारी 
तू तो हयो तीनो लोक ठाकुर हम होई जनक भिखारी

कंहवा कै यह माती हथिनिया

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

कंहवा कै यह माती हथिनिया, कंहवा कै यह जाए 
केहिके दुआरे लवंगिया कै बिरवा, तेहि तरे हथिनी जुड़ाए 

उन्ह्वा वर का निवास कै यह माती हथिनिया, 
उन्ह्वा वधु का निवास कै यह जाए
फलाने बाबू वधु के पिता का नाम द्वारे लवंगिया कै बिरवा, 
तेहि तरे हथिनी जुड़ाए 

महला से उतरे हैं भैया कवन बाबु वधु के भाई का नाम,
हाथ रुमालिया मुख पान 
आपनि हथिनी पछारो बहनोइया, 
टूटै मोरी लौंगा क डारि 

भितरा से निकरी हैं बहिनी कवनि देई वधु का नाम, 
सुनो भैया बिनती हमारि 
जेहिके दुआरे भैया इत्ता दल उतरा सुघर बर उतरा, 
त का भैया लौंगा क डारि??

अबहीं बारी है हमारी उमिरिया बाबा 

अबहीं बारी है हमारी उमिरिया बाबा 
डारो शादी की अबहीं ना बेडिया बाबा

मै तोरी बगिया की नाजुक कलिया 
डोले फिरूँ तोरे अँगना महलिया
तोहरे घरवा की हम हैं अंजोरिया बाबा 

कच्चा घडा जैसन हमरी बदनिया 
गलि जाई बाबा परी जब पनिया 
छाई हमरे जीवन मे अन्हरिया बाबा 

ब्याह की जल्दी ना करना तेयरिया 
कर देना जब हो अठारह की उमिरिया 
तोहरी महकी जब फुलवरिया बाबा

सावन गीत
सावन

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

सावन आए ओ री सखी री, मंदिर छावै सब कोय रे 

अरे, हमरा मंदिरवा को रे छैहें, हमरे तो हरी परदेस रे 

काह चीर मैं कगदा बनावौं, काहेन की मसियाली रे 
अरे, कोहिका मैं बनवों अपना कैथवा, चिठिया लिक्खहि समुझाई के 

अंचरा चीरी मैं कगदा बनावहु, अंसुअन की मसियाली रे 
अरे, लहुरा देवरवा बनवों कैथवा, चिठिया लिखहि समुझाई के 

अरे अरे कागा तोहे देबै धागा, सोनवा मेढौबे तोरी चोंच रे 
अरे, जाई दिह्यो मोरे पिय का संदेसवा, चिठिया पढयो समुझाई के 

नहाइ धोई राजा पुजवा प बैठे, चिठिया गिरी भहराई के 
अरे, चिठिया बांचे बाँची सुनावै, पटर पटर चुवै आंस रे 

सुन सुन कागा हमरा संदेसवा, रानी का दिह्यो समुझाई के 
अरे, बरिया बोलाइ रानी बँगला छ्वावैं, हमरा आवन नहीं होए रे

सावन मा रानी चुनरी रंगैहैं, पहिरहि मन-चित लाइ के 
अरे, सब सखियन संग झूलन जैहैं हमरिही सुधि बिसराई के

केही केरे सिर सोहे सोने क छतुरिया

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

केही केरे सिर सोहे सोने क छतुरिया, केहिया सिर ना 

रामा ढुरेला पसीनवा केहिया सिर ना 

राम जी के सिर सोहै सोने क छतुरिया, लखन सिर ना 
रामा ढुरेला पसीनवा लखन सिर ना 

सीता आवो मोरे देवरा अंगन मोरे बैठो, के मैं पोंछी देउ ना 
तोहरे सिर का पसीनवा मै पोंछि देउ ना 

लक्ष्मण सिर का पसीनवा तु जनि पोंछौ भौजी, के धूमिल होइहैं ना 
तोहरी चटकी चुनरिया धूमिल होइहैं ना 

सीता चुनरी त हमरी धोबीया घरे जैहैं, के लखन ऐस ना 
कहाँ देवरा मैं पैहों के लखन ऐस ना

हिंडोला कुँज वन डालो झूलन आईं राधिका प्यारी

हिंडोला कुँज वन डालो झूलन आईं राधिका प्यारी
कहे के खंभ लगवाए कहे की लगी डोरियाँ प्यारी 
सोने के खंभ लगवाए रेशम लगी डोरियाँ प्यार
हिंडोला... 
कहाँ से आये शयाम बनवारी कहाँ से आई राधिका प्यारी
गोकुल से आये बनवारी मथुरा आइ राधिका प्यारी
हिंडोला... 
कि झोंका धीरे से दे ओ हमें दर लगता भारी
दरो मत राधिका प्यारी हमें तो तुम जान से प्यारी
हिंडोला...

नकटा
लागा झुलानिया प धक्का

लागा झुलानिया प धक्का, बलम कलकत्ता पहुंची गए 


कैसे क मति मोरी बैरन होई गई 
कीन्ह्यो मैं हठ अस पक्का, बलम कलकत्ता...

लागे जेठानिया के बोल बिखै ज़हर से 
लागा करेजवा में लुक्काआग , बलम कलकत्ता...

रेक्सा चलायें पिया तांगा चलायें 
झुलनी के कारण भयें बोक्का पागल, बलम कलकत्ता...

बरहें बरिस झुलनी लई के लौटें ,
देहिंयाँ हमारि भै मुनक्का, बलम कलकत्ता...

लागा झुलानिया प धक्का बलम कलकत्ता पहुँची गए

मैं तोर गुन जानि गयूँ ए नान गुटकी

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

मैं तोर गुन जानि गयूँ ए नान गुटकी 

दाल बनाईं भात बनाईं और बनाईं फुलकी, 
सारा जेवना जेई के भर्तार पति के आगे ठुनकी 
मैं तोर गुन...

लौंग इलाइची बीरा खाईं आवै लागीं हिचकी, 
सीसा लै के मुंह निहारें गाल होई गे सुट्की 
मै तोर गुन...

मारी गईं पीटी गईं कोने जाए सुसकी,
तनिक नैना ओट भएँ बांधे लागी पुटकी 
मैं तोर गुन...

सेज सुपेती दासन पाइन संझवय से खसकी,
सारे पलंग पर अपना सोवैं पिया का काटें चुटकी 
मैं तोर गुन...

तुम मोरी बात बिगाड्यो बारे रसिया

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

तुम मोरी बात बिगाड्यो बारे रसिया 

मन भरे का जात मंगौबे हाथ भरे क चकिया 
पिसौबे बारे रसिया पिसौबे बारे रसिया, 
सोलह सेर पिसना पिसौबे बारे रसिया 

हाथ बढ़निया लिहे बगल छिटनिया 
झारौबे बारे रसिया झरौबे बारे रसिया, 
झाँसी वाली लैन झरौबे बारे रसिया 

हाथे मा हथकड़ी डरौबे पांए मा पैजनिया 
देखौबे बारे रसिया देखौबे बारे रसिया, 
कानपुर का जेहल जेल देखौबे बारे रसिया

हमसे खिंचत न गगरिया कमर मोरी छल्ला मुन्दरिया

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

हमसे खिंचत न गगरिया कमर मोरी छल्ला मुन्दरिया 

वोहि सासू मोरी जनम की बैरनि,
दुई-दुई भरावें गगरिया, कमर मोरी छल्ला मुन्दरिया 

वोहि देवरा मोरे बचपन का साथी 
काँधे टेकावै गगरिया मोरी छल्ला मुन्दरिया 

अंटा चढ़े उइ सैयां जो देखैं, 
कहैं इक-इक उठावो गगरिया, कमर तोरी छल्ला मुन्दरिया 

जो सैयां हमें इतना चाहत हो,
भोरै लगावौ कहरिया, कमर मोरी छल्ला मुन्दरिया

पटना से बैदा बोलाई द्या नजरा गैली गोरिया

पटना से बैदा बोलाई द्या नजरा गैली गोरिया 

काहे से आएं बैदा बेटौना, 
काहे से आई दवाई रे, नजरा गैली गोरिया 

मोटर से आएं बैदा बेटौना, 
टेम्पो से आई दवाई रे, नजरा गैली गोरिया 

बैदा बेटौना पलंग चढ़ी बैठो,
नाड़ी का रोग बताओ रे,नजरा गैली गोरिया 

न इनके गर्मी न इनके सर्दी, 
इनके तो चढ़ी है मोटाई रे,नजरा गैली गोरिया

जाँत गीत
कब चुकबे चलनी कै गोंहुआँ हो न

कब चुकबे, कब चुकबे चलनी कै गोंहुआँ हो न।
मोरा बीरन भइया आये अनवइया हो न।।
बैइठहु न मोरे भइया रतनी पलँगिया हो न।
बहिनी कहि जाऊ आपन हवलिया हो न।।

नौ मन कूट्यों भइया नौ मन पीस्यों हो न।
भइया पहिली टिकरिया मोर भोजनवा हो न।।
भइया वोहू महैं कुकरा बिलरिया हो न।।
भइया वोहू महैं गोरू चरवहवा हो न।।
भइया वोहू महैं देवरा कलेवना हो न।।
भइया वोहू महैं ननदी कलेवना हो न।।

फटही लुगरिया भइया हमरा पखरुआ हो न।
भइया वोहू महैं गोरू चरवहवा हो न।।
भइया वोहू महैं ननदी ओढनिया हो न।।
भइया वोहू महैं देवरा भगइया हो न।।

ई दुख जिन कह्या बाबा के अगवा हो न।
भइया सभवा बइठ बाबा रोइहैं हो न।।
ई दुख जिन कह्या माई के अगवा हो न।
भइया मचिया बइठ माई रोइहैं हो न।।
ई दुख जिन कह्या सखिया के अगवा हो न।
भइया खेलतै खेलत सखियाँ रोइहैं हो न।।

ई दुख जिन कह्या बहिनी के अगवा हो न।

भइया इहै सुनि गवने न जइहैं हो न।।
ई दुख जिन कह्या भाभी के अगवा हो न।
भइया राम रसोइयाँ तनवा मरिहैं हो न।।
ई दुख कह्या भइया अगुआ के अगवा हो न।
भइया जेन कीहें मोरी अगुअइया हो न।।

विदाई गीत
विदाई गीत एक बन गईं दुसरे बन 

एक बन गईं दुसरे बन गईं तीसरे बबिया बन 
बेटी झलरी उलटी जब चित्वें तो मैया के केयू नाही 
लाल घोड़ चितकबर वहिसे वै पिया बोलें 
धना हमरे पतुक आंसू पोछो मैया सुधि भूली जाव
केना मोरी भुखिया अगेंहैं तो केना पियसिया 
केना जगहियें आल्ह्ड निन्दियन अपने मैयरिया बिन 
मईया मोरी भुखिया अगेंहैं बहिनी पियसिया 
हमही जगेईबै आल्ह्ड निन्दिया तो मईया सुधि भूली जाओ 
मईया तोहरी गरियहै बहिनी टुकरीहै 
आपे प्रभु गरजी तड़प बोलिहै छतिया बिहरी जेईहैं 
मईया मोरी बहुअरि गोहरैहैं बहिन भउजी 
कहिहैं हमही लागैबें हिरदैया मईया सुधि भूली जाओ

सावन सुअना माँग भरी

सावन सुअना माँग भरी बिरना तो चुनरी रँगाई अनमोल।
माता ने दीन्हेगउ नौ मन सोनवाँ तौ ददुली ने लहर पटोर।।
भैया ने दीन्हेगउ चढ़न को घेड़वा, भौजी मोतिन को हार।
माता के राये ते नदिया बहति है, ददुली के रोये सागर पार।।
भैया के रोये टुका भीजत है, भौजी के दुइ-दुइ आँस।

मोह न छोड्यो मोर महतारी

मोह न छोड्यो मोर महतारी 

एक कोखि के भैया बहिनिया 
एकहि दूध पियायो महतारी 
मोह न...

भैया के भए बाजै अनद बधैया 
हमरे भए काहे रोयो महतारी ?
मोह न...

भैया का दिह्यो मैया लाली चौपरिया 
हमका दिह्यो परदेस महतारी 
मोह न...

सँकरी गलिय होई के डोला जो निकरा 
छूटा आपन देस महतारी 
मोह न...

रोटी गीत
की हे जी, हाथे मा लोटिया बगल मा धोतिया

रचनाकार: सिद्धार्थ सिंह 

की हे जी, हाथे मा लोटिया बगल मा धोतिया, जनक जी चले हैं नहाय
की हे जी, आजु चौपरिया लिपायो मोरी रनिया, पूजब सालिगराम
की हे जी, सुरहिनी गैया क गोबरा मंगायों, गंगा जमुनवा क नीर
की हे जी, झुक धरि लीपन्ही बेटी जानकी, धनुष दिहिन खसकाय
की हे जी, नहाई धोई जब लौटे जनक जी, पड़ी चौपरिया निगाह
की हे जी, आजु चौपरिया कवन रनिया लीपिन, धनुष दिहिन खसकाय
की हे जी, रोजु त लीपहि सोन चिरैय्या कौशल्या, तिल भरि सरकि न पाए
की हे जी, आजु त लीपिन बेटी जानकी, धनुष दिहिन खसकाय
की हे जी, इतनी बचन राज सुनयू न पायें, कीन्हि नगर मा शोर
की हे जी, जो धनुहा तूरी लेइहैन वही कुलभूसन, सीता ब्याहि लई जाएँ
की हे जी, यह प्रण कीहन्यो जो बाबा मोरे, तोर प्रण हमै न सोहाय
की हे जी, जो धनुहा तॊरि लैहैं बन के असुरवा हमका ब्याहि लई जाएँ ?


निर्गुण
संसार धूमिल भई

ससुरेपरलोक क चुनरी नैहरवा संसार धूमिल भई
राजा जी परमात्मा जैहें पहिचानि ,करब हम कौन बहाना
आवा गवन...

मोरे पिछवारे रंगरेजवा बेटौना गुरु
बीरन लागौ हमार ,करब हम कौन बहाना
आवा गवन...

एक बोर मोरी बोरौ चुनरिया ज्ञान,
भक्ति और कर्म के आलोक से मेरी आत्मा की शुद्धि कर दो
राजा न पावें पहिचानि ,करब हम कौन बहाना
आवा गवन...

संकरी गलिय होई के डोला जो निकरा
छूटा जो आपन देस ,करब हम कौन बहाना
आवा गवन...

आवा गवन नगिच्याय करब अब कौन बहाना


फाग
दै दै मुरलिया मोरी राधिका

कृष्ण:--दै दे मुरलिया मोरी राधिका, दै दे मुरलिया मोरी
राधिका दै दे मुरलिया

कृष्ण:-- यह मुरली मोरे प्राण बसत है
वहो भाई रे चोरी राधिका, वहो भाई रे चोरी
राधिका दै दे मुरलिया...

कृष्ण:-- काहे से गौबे काह बजौबे
काहे से गौवें टेरी राधिका, काहे से गौवें टेरी ?(गायों को कैसे बुलाऊँ )
राधिका दै दे मुरलिया...

राधा:-- मुख से गावो ताल बजावो
बोलि के गौवें टेरो श्याम, तुम बोलि के गौवें टेरो
श्याम न देबे मुरलिया तोरी...

राधा:-- एहि मुरली धुन खूब सतायो
खूब करयो है बरजोरी श्याम, तुम खूब करयो है बरजोरी
श्याम न देबे मुरलिया तोरी...

कृष्ण:-- हाथ जोड़ तोसे विनय करत हूँ
प्रण करत कलिन्दी (यमुना) ओरी राधिका, करत कलिन्दी ओरी
राधिका दै मुरलिया मोरी...



अन्य गीत
बारामासी : बरसन लागी सावन बुन्दिया

बरसन लागी सावन बुन्दिया, प्यारे बिन लागे न मोरी अंखिया
चार महीना बरखा के आये, याद आवे तोहरी बतियां
प्यारे बिन लागे न मोरी अंखिया
चार महीना जाडा के बीते, तरपत बीती सगरी रतियां
प्यारे बिन लागे न मोरी अंखिया
चार महीना गरमी के लागे, अजहुं ना आये हमारे बलमा
प्यारे बिन लागे न मोरी अंखिया

बिरहा 

जौ मैं जनतिउँ ये लवँगरि एतनी महकबिउ हो।
लवँगरि रँगतिउँ छयलवा के पाग सहरबा म मगकत हो।
अरे अरे कारी बदरिया तुहहिं मोरि बादरि हो।
बदरी जाइ बरसहु वहि देस जहाँ पिए छाए हो।
बाउ बहइ पुरवइया त पछुवा झकोरइ हो।
बहिनी दिहेऊँ केवँरिया ओढ़काई सोवउँ सुख नींदरि हो।। 
की तुँइ कुकुर बिलरिया, सहर सब सोवइ हो।
की तुँइ ससुर पहरुवा, केंवरिया भड़कायेउ हो।
ना हम कुकुर बिलरिया न ससुर पहरुवा हो।
धना हम अही तोहरा नयकबा बदरिया बोलायेसि हो।। 
आधी राति ‌बीति गई बतियाँ, तिहाई राति चितियाँ हो।
रामा बारह बरस का सनेह जोरत मुरगा बोलइ हो।। 
तोरउँ मैं मुरगा का ठोर गटइया मरोरउँ हो।
रामा काहे किहेउ भिनसार त पियहिं जतायेउ हो।।
काहे रानी तोरहु ठोर गटइया मरोरहु हो।
रानी हौइगे धरमवाँ कै जून भोर होत बोलेउँ हो।।

पैसा ऐसी चीज राजा घरै नहीं आवैं

पैसा ऐसी चीज राजा घरै नहीं आवैं

कि अरे महला पुराने होई गें 
टपकन लगी बूँद, राजा घरै नहीं आवैं 

कि अरे ननदी सयानी होई गईं 
मानै नहीं बात, राजा घरै नहीं आवें

कि अरे देवरा सयाने होई गें 
पकड़न लगे बांह, घरै नहीं आवैं 

कि अरे हमहूँ पुरानी होई गईं 
पाकन लगे बार, राजा घरै नहीं आवैं

मैं अलबेली गुदाय आई गुदना 

मैं अलबेली गुदाय आई गुदना 
मैं जो गई पानी भरने संग गए अपना 
टूट गयी रस्सी लटक गये अपना
मैं अलबेली... 
मैं जो गई रोटी करने संग गए अपना 
फूल गई रोटी पिचक गए अपना 
मैं अलबेली... 
मैं जो गई छोटी करने संग आये अपना 
टूट गई कंघी चटक गए अपना 
मैं अलबेली...

सरौता कहाँ भूलि आये प्यारे नन्दोइय़ा

सरौता कहाँ भूलि आये प्यारे नन्दोइय़ा 
सास खाए बर्फी ननद खाए प़ेड़ा 
मैं बेचारी रबड़ी खाऊन 
दोना चाटे सैय्याँ -----सरोता 
सास को लाये एटलस ननद को मखमल 
मैं बेचारी रेशम पहनूं 
टाट लपेटे सैय्याँ ------सरोता 
सास म्हारी रिक्शा चाले नन्द चढ़े तांगा 
मई बेचारी मोटर चालूँ 
पैदल चाले सैय्याँ -----सरोता
सासू म्हारी खटिया सोवें ननन्द बिछोना 
मैं बेचारी पलन्गा सौउं 
भुइयां सोवें सैय्यां ---सरोता

जल भर ले हिलोरें हिलोर रसरिया रेशम की

जल भर ले हिलोरें हिलोर रसरिया रेशम की 
अरर जल भर ले हिलोरे हिलोर ----
रेशम की रसरी तब नीकी ल़ागे 
सोने की गगरिया होय --रसरिया रेशम की 
सोने की गगरी तब नीकी लागे
सुघड़ महरिया होय ---रसरिया रेशम की 
सुघड़ महरिया तब नीकी लागे 
साथे में छैला होय ---रसरिया रेशम की 
साथे म छैला तब नीको लागे 
गोदी म ललना होय --रसरिया रेशम की 
सुघड़ महरिया तब नीकी लागे 
सत् रंग चुनरी हा---रसरिया रेशम की 
सतरंग चुनरी तब मीको लागे 
मखमल का लहंगा होय ---रसरिया रेशम की 
मखमल का लहंगा तब नीको लागे 
सब अंग गहना होय ----रसरिया रेशम की


[ श्रेणी : अवधी लोकगीत। रचनाकार : अज्ञात ]