'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

अम्मा चली गई / शशिकांत गीते

शशिकांत गीते
पूजा-घर का दीप बुझा है
अम्मा चली गई.

अंत समय के लिए सहेजा
गंगा-जल भी नहीं पिया
इच्छा तो कितनी थी लेकिन
कोई तीरथ नहीं किया
बेटों पर विश्वास बडा था
आखिर छली गई.

लोहे की संदूक खुली
भाभी ने लुगडे छाँट लिये
औ' सुनार से वजन करा कर
सबने गहने बाँट लिये
फिर उजले संघर्षो पर भी
कालिख मली गई.

रिश्तेदारों की पंचायत
घर की फाँके, चटखारे
उसकी इच्छाओं, हिदायतों
सपनों पर फेरे आरे
देख न पाती बिखरे घर को
अम्मा! भली गई

[ संकलन : माँ । शशिकांत गीते ]