'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

दादी माँ के छोटे-छोटे पांव / दिनेश सिंह

दिनेश सिंह
दादी माँ के छोटे-छोटे पांव
रास्ते छोटे छोटे।

जीवन उतना जितने रिश्ते
सांसें उतनी जितने बोल

उतनी प्यास कि जितना पानी
दुःख उतना जितना भूगोल
संझा तुलसी चौरा टपके आँख
दिवस का दर्द कचोटे।

कोहबर की यादें गठियाये
आँचल में मुरझाये फूल
इतिहासों के पन्नों पर
करलीं सारी गलतियां क़ुबूल
हतप्रभ तकती चाल समय की
और चलन के सिक्के खोटे।

थे पहाड़ से पिता हमारे
पुरखे थे पेड़ों की छाँव
बर्फ और पत्तों के नीचे
बसा हुआ था सारा गाँव
भूख-प्यास में देह गलाते
अंग जलाते कसे लंगोटे।

[ संकलन : माँ । दिनेश सिंह ]