'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

बूढ़ी माँ / दिविक रमेश

दिविक रमेश
बूढ़ी माँ ने धोकर दाने
आँगन में रख दिए सुखाने
धूप पड़ी तो हुए सुहाने
आई चिड़ियाँ उनको खाने

आओ बच्चो आओ चलकर
बूढ़ी माँ की मदद करें हम
चलो उड़ा दें दानों पर से
बजा बजा कर ताली हम तुम

वर्ना सोचो क्या खाएगी
वह तो भूखी रह जाएगी
चिड़ियों की यह फौज नहीं तो
सब दानें चट कर जाएगी।

आओ बच्चो आओ चलकर
बूढ़ी माँ का काम करें हम
नहीं हैं बच्चे उनके घर में
चलो न चलकर काम करें हम

[ संकलन : माँ ।  दिविक रमेश ]