'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

रिश्ता /अनामिका

वह बिलकुल अनजान थी! 
मेरा उससे रिश्ता बस इतना था 
कि हम एक पंसारी के ग्राहक थे 
नए मुहल्ले में। 

वह मेरे पहले से बैठी थी 
टॉफ़ी के मर्तबान से टिककर 
स्टूल के राजसिंहासन पर। 

मुझसे भी ज्यादा थकी दीखती थी वह 
फिर भी वह हँसी! 
उस हँसी का न तर्क था 
न व्याकरण 
न सूत्र 
न अभिप्राय! 
वह ब्रह्म की हँसी थी। 

उसने फिर हाथ भी बढ़ाया 
और मेरी शाल का सिरा उठाकर 
उसके सूत किए सीधे 
जो बस की किसी कील से लगकर 
भृकुटि की तरह सिकुड़ गए थे। 

पल भर को लगा, उसके उन झुके कंधों से 
मेरे भन्नाए हुए सिर का 
बेहद पुराना है बहनापा।

[ श्रेणी :कविता । अनामिका ]