'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

चुने हुए भोजपुरी लोकगीत

1. विविध गीत
  • कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया / भोजपुरी
  • हेरा गइले बदरी में चनवां / भोजपुरी
  • हमरा चान लागे लू / भोजपुरी
  • आल्हा / भोजपुरी
  • चौथ चन्दा गीत / भोजपुरी
  • डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार / भोजपुरी
  • नवमी गीत / भोजपुरी
  • पराती / भोजपुरी
  • पितर नेवतौनी / भोजपुरी
  • विदाई का गीत / भोजपुरी
  • फगुआ के गीत / भोजपुरी
  • चहका / भोजपुरी
  • जोगीरा / भोजपुरी
  • प्रश्नोत्तर में जोगीरा / भोजपुरी
  • वनिक / भोजपुरी
  • श्रमिक बोल / भोजपुरी
  • रजमतिया के चिट्टी / भोजपुरी
  • रमजनिया का दुखड़ा / भोजपुरी
  • धोबी के गीत / भोजपुरी
  • मथुरा के लोगवा / भोजपुरी
  • मुरली / भोजपुरी
  • एके कोखी बेटा जन्मे एके कोखी बेटिया / भोजपुरी
  • मति करऽ राम वियोग / भोजपुरी
  • मैं ना जीओं बिनु राम / भोजपुरी
  • अमवा के लागेला टकोरवा रे संगिया / भोजपुरी
  • हाथ में मेहंदी मांग सिन्दूरवा / भोजपुरी
  • बलम मति जइयह / भोजपुरी
  • मोरे जोबना में / भोजपुरी
  • छलकल गगरिया रे / भोजपुरी
  • कइलीं हम कवन कसूर / भोजपुरी
  • मजूरी कई के . भोजपुरी
  • कैसे कटी जिनगी हमार / भोजपुरी
  • नक्बेसर कागा ले भागा / भोजपुरी
  • रामलाल क फगुवा / भोजपुरी
  • पातर-पातर गोरिया के पतरी कमरिया / भोजपुरी
  • हमनी के रहब जानी दूनू हो परानी / भोजपुरी
  • सासु मोरा मारे राम बाँस के छिऊकिया / भोजपुरी
  • छिंगुनिया के छल्ला / भोजपुरी
  • रेलिया बैरन पिया को लिये जाये रे / भोजपुरी
  • सेन्दुर सम्भाल के उथईहा ए सुन्दर बर / भोजपुरी
  • हरे हरे हरे दादा बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो / भोजपुरी
  • मडवा के गीत / भोजपुरी
  • विवाह गीत
  • बाबा कवने नगरिया जुआ खेललऽ /भोजपुरी
2. छठ गीत / भोजपुरी
3. सोहर / भोजपुरी
4. आल्हा / भोजपुरी
5. चौथ चन्दा गीत / भोजपुरी
6. नवमी गीत / भोजपुरी
7. पराती / भोजपुरी
8. पितर नेवतौनी / भोजपुरी
9. विदाई का गीत / भोजपुरी
10. फगुआ के गीत / भोजपुरी
11. देशभक्ति / भोजपुरी
12. बारहमासा / भोजपुरी
13. निर्गुण / भोजपुरी


कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया

कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी

तू तौ जात हौ अकेली
कौनो संग न सहेली
गुण्डा रोकि लींहें तोहरी डगरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी

भौजी बोलेलू तू बोली
सुनिके लागल हमरा गोली
काहे पड़ल बाड़ू हमरी नगरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी

केतने दामुल फाँसी चढ़िगे
केतने गोली खाके मरिगे
केतने पीसत होइहैं जेल में चकरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी। 


हेरा गइले बदरी में चनवां

हेरा गइले बदरी में चनवां[1] रे गुइयां चैत महीनवां ।

पागल पवनवां सुमनवा बटोरे,
नरमी चमेलियन के बंहियां मरोड़े
पांख झारि नाचेला मोरवा रे गुइयां चैत महीनवां ।

कोइली के बोली मोरा जियरा जरावे,
घर-आंगन मोहे तनिको ना भावे
देवरा पापी निरखे जोबनवां रे गुइयां, चैत महीनवां ।

शब्दार्थ:
चाँद


हमरा चान लागे लू 

तू देख जनि चान, हमरा चान लागे लू।
मचा देबू कहियो तूफान लागे लू।

मत करिह सिंगार, मिली ओरहन हजार
तोहके देखे खातिर मेला में हो जायी मार
रूप के तू बड़हन दुकान लागे लू।

केहू आपन दौलत करेला निछावुर
सुध-बुध केहू खो के बनि जाना बाउर
तूर देबू सबकर गुमान लागू लू।

हंसि हंसि के जन आज बिजुरी गिराव
अभिज्ञात जी के जनि पागल बनाव
अंगड़ाई ले लू कमान लागे लू।


आल्हा

लागल कचहरी जब आल्हा के बँगला बड़े-बड़े बबुआन
लागल कचहरी उजैनन के बिसैनन के दरबार
नौ सौ नागा नागपूर के नगफेनी बाँध तरवार
बैठल काकन डिल्ली के लोहतमियाँ तीन हजार
मढ़वर तिरौता करमवार है जिन्ह के बैठल कुम्ह चण्डाल
झड़ो उझनिया गुजहनिया है बाबू बैठल गदहियावाल
नाच करावे बँगला में मुरलिधर बेन बजाव
मुरमुर मुरमुर बाजे सरंगी जिन्ह के रुन रुन बाजे सितार
तबला चटके रस बेनन के मुखचंद सितारा लाग
नाचे पतुरिया सिंहल दीप के लौंड़ा नाचे गोआलियरवाल
तोफा नाचे बँगला के बँगला होय परी के नाच
सात मन का कुण्डी दस मन का घुटना लाग
घैला अठारह सबजी बन गैल नौ नौ गोली अफीम
चौदह बत्ती जहरन के आल्हा बत्ती चबावत बाय
पुतली फिर गैल आँखन के अँखिया भैल रकत के धार
चेहरा चमके रजवाड़ा के लड़वैया शेर जवान
अम्बर बेटा है जासर के अपना कटले बीर कटाय
जिन्ह के चलले धरती हीले डपटै गाछ झुराय
ओहि समन्तर रुदल पहुँचल बँगला में पहुँचल जाय
देखल सूरत रुदल के आल्हा मन में करे गुनान
देहिया देखें तोर धूमिल मुहवाँ देखों उदास
कौन सकेला तोर पड़ गैल बाबू कौन ऐसन गाढ़
भेद बताब तूँ जियरा के कैसे बूझे प्रान हमार
हाथ जोड़ के रुदल बोलल भैया सुन धरम के बात
पड़ि सकेला है देहन पर बड़का भाइ बात मनाव
पूरब मारलों पुर पाटन में जे दिन सात खण्ड नेपाल
पच्छिम मारलों बदम जहौर दक्खिन बिरिन पहाड़
चार मुलुकवा खोजि ऐलों कतहीं नव जोड़ी मिले बार कुआँर
कनियाँ जामल नैना गढ़ में राजा इन्दरमन के दरबार
बेटी सयानी सम देवा के बर माँगल बाघ जुझर
बड़ि लालसा है जियरा में जो भैया के करौं
बियाह करों बिअहवा सोनवा से
एतना बोली आल्हा सुन गैल आल्हा मन मन करे गुनान
जोड़ गदोइ अरजी होय गैल बबुआ रुदल कहना मान हमार
जन जा रुदल नैनागढ़ में बबुआ किल्ला तूरे मान के नाहिं
बरिया राजा नैना गढ़ के लोहन में बड़ चण्डाल
बावन दुलहा के बँधले बा साढ़े सात लाख बरियात
समधी बाँधल जब गारत में अगुआ बेड़ी पहिरलन जाय
भाँट बजनियाँ कुल्हि चहला भैल मँड़वा के बीच मँझार
एकहा ढेकहो ढेलफुरवा मुटघिंचवा तीन हजार
मारल जेबव् नैनागढ़ में रुदल कहना मान हमार
केऊ बीन नव्बा जग दुनिया में जे सोनवा से करे बियाह
जन जा रुदल नैना गढ़ में बबुआ कहना मान हमार
प्रतना बोली रुदल सुन गैल रुदल बर के भैल अँगार
हाथ जोड़ के रुदल बोलल भेया सुनी बात हमार
कादर भैया तूँ कदरैलव् तोहरो हरि गैल ग्यान तोहार
धिरिक तोहरा जिनगी के जग में डूब गैल तरवार
जेहि दिन जाइब नैना गढ़ में अम्बा जोर चली तरवार
टूबर देहिया तूँ मत देखव् झिलमिल गात हमार
जेहि दिन जाइब नैना गढ़ में दिन रात चली तरवार
एतना बोली आल्हा सुन गैल आल्हा बड़ मोहित होय जाय
हाथ जोड़ के आल्हा बोलल बाबू सुनव् रुदल बबुआन
केत्त मनौलों बघ रुदल के बाबू कहा नव् मनलव् मोर
लरिका रहल ता बर जोरी माने छेला कहा नव् माने मोर
जे मन माने बघ रुदल से मन मानल करव् बनाय
एतना बोली रुदल सुन गैल रुदल बड़ मंड्गन होय जाय
दे धिरकारीरुदल बोलल भैया सुनीं गरीब नेवाज
डूब ना मूइलव् तूँ बड़ भाइ तोहरा जीअल के धिरकार
बाइ जनमतव् तूँ चतरा घर बबुआ नित उठ कुटतव् चाम
जात हमार रजपूतन के जल में जीबन है दिन चार
चार दिन के जिनगानी फिर अँधारी रात
दैब रुसिहें जिब लिहें आगे का करिहें भगवान
जे किछु लिखज नरायन बिध के लिखल मेंट नाहिं जाय


चौथ चन्दा गीत 

चौथ (भाद्र शुदी चौथ) के दिन गणेश-पूजा के दिन स्कूली बच्चों द्वारा गाया जाने वाला चौथ चंदा गीत। भाद्रसुदी चौथ को स्कूली बच्चे गुरूजी के साथ समूह में प्रत्येक विद्यार्थी के घर लकड़ा बजाते और इन गीतों को गाते हुए जाते हैं। विद्यार्थी के माता-पिता विदाई में अन्न, वस्त्र और द्रव्य देते हैं, उसे लाकर स्कूल में जमा किया जाता है, वस्त्र गुरूजी को दे दिया जाता है; अन्न-द्रव्य से स्कूल में भोज का आयोजन होता है, जिसमें गुरूजी के साथ सभी बच्चे भाग लेते हैं। यह प्रथा अब गाँव के स्कूलों में दिखाई नहीं पड़ती।

१.
खेलत खेलत एक कउड़ी पवनी
उ कउड़ी गंगा दहवऽली 
गंगा मुझको बालू दिया, उ बालू गोड़िनिया लिया।
गोड़िनिया मुझको भार दिया, उ भार घसवहा लिया। 
घसवहा मुझको घास दिया, उ घास गैया लिया। 
गइया मुझको दूध दिया, उ दूध बिलैया लिया। 
बिलइया मुझको चूहा दिया, उ चूहा चिल्होरिया लिया। 
चिल्होरिया मुझको पाँख दिया, उ पाँख राजा लिया।
राजा मुझको घोड़ा दिया।

२.
रामजी चले लछुमनजी चले, महावीरजी चले, लंका दाहन को। 
तैंतीस कोट प्रदुम्न चले, जैसे मेघ चले बरिसावन को। 
का करिहें उत्पात के नन्दन, का करिहें तपसी दोनों भइया।
मार दिहें उत्पात के नन्दन, काटि दिहें तपसी दोनों भइया। 

३.
सूर्यकुल वंशवा में जन्म लिहले रामचन्द्र, 
कोशिला के कोख अवतार रे बटोहिया। 

४.
एक मती हरताल ताला, जहाँ पढ़ावे पंडित लाला। 
पंडित लाला दिये असीस, जीओ बचवा लाख बरीस। 
लाख बरीस की उमर पाई, दिल्ली से गजमोती मंगाई।
आव रे दिल्ली, आजम खाँव। आजम खाँव चलाया तीर, बचा कोई रहा न वीर। 
जय बोलो जय रामा रघुवर, सीता मैया करे रसोइया 
जेवें लछुमन रामा, ताहि के जूठन काठन पा गया हनुमाना।
सोने के गढ़ लंका ऊपर कूद गया हनुमाना।

५.
बबुआ हो बबुआ, सिताब लाल बबुआ
बबुआ के माई बड़ा हई दानी, 
लइकन के देख-देख भागे ली चुल्हानी। 
घर में धोती टांगल बा, 
बाकस में रुपेया कूदऽ ता 
घर में धरबू चोर ले जाई 
गुरुजी के देबू, नाम हो जाई। 
बबुआ आँख मुनौना भाई, 
बिना किछु लेहले चललऽ ना जाई। 

६.
छाते थे भाई छाते थे, 
छाते-छाते भूख लगी। 
अनार की कलियाँ तोड़ लिया, बंगाली का छोकड़ा देख लिया।
धर टाँग पटक दिया, रोते-रोते घर गया।
घर का मालिक दौड़ा आया, दिल्ली-कोस पुकारते आया।
आव रे दिल्ली-आजम खाँव, आजम खाँव चलाया तीर, 
बचा कोई रहा न वीर।
थर-थर काँपे जमुनापुरी,
जमुनापुरी से आया वीर, मार गया दो छैला तीर।
छैला मांगे एक छलाई, दिल्ली से गजमोती मंगाई।

७.
एक दिन सतराजीत के भाई, पहुँचे वन में जाई।
वहाँ भादो का बहार दिखलाए हुए थे
करते -करते शिकार, खुद बन गए शिकार
हाथी -घोड़ा से भी साज वे सजाए हुए थे।
सुनकर जामवन्त गुर्राया, उनको क्रोध और चढ़ि आया।
पहले बातों से बहलाए, वह शर्माए हुए था।
भारी होने लगी लड़ाई, जामवन्त को बात याद जब आई 
हमको दर्शन देने आज रघुराई आए थे।


डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार

रचनाकार: अभयकृष्ण की प्रस्तुति 

डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार।

गेहुँआ मण्टरिया से लहरल सिवनवा, होखे निहाल भइया सगर किसनवा
धरती के बाढ़ल श्रृंगार मगन मन होला हमार।।

बिहँसेला फुलवा महकेला क्यारी, ताक झाँक भँवरा लगावे फुलवारी
मौसम में आइल बहार मगन मन होला हमार।।

आईल कोयलिया अमवाँ के डरिया, पीयर चुनरिया पहिरे सवरियाँ
सोहेला पनघट किनार मगन मन होला हमार।।


नवमी गीत

१.
हमरा शीतलऽ मइया बड़ दुलरी,
मइया बड़ दुलरी मइया डोला चढ़ि आवेली हमार नगरी।
जाउ हम जनतीं अइहें हमार नगरी (जाउ=यदि)
मइया डगर बहरतीं दहिनवें अंचरी।

२.
नीमिया के डाढ़ मइया गावेली हिंडोलवा कि झूलि-झूलि ना।
झूलतऽ झूलतऽ मइया के लगली पिअसिया कि चलि भइली ना
मलहोरिया दुआर, मइया चलि भइली ना
सुतल बाड़े कि जागल रे मलिया
बूँद एक आहि के पनिया पिआव कि बूँद एक
कइसे में पनिया पिआईं मैया
कि बालका तोहार मोरे गोद
लेहु नाहि मालिनी बालका, सुताव सोने के खटोलवा कि बूँद एक
मोहिके पनिआ पिआव।
एक हाथ लेहली मालिन झँझरे गड़ुअवा
दोसरे हाथ सिंहासन 
जइसन मालिन हमरे जुड़वलू ओहिसन पतोहिया जुड़ास,
धिअवा जुड़ास धीया बाढ़ो ससुरे, पतोह बाढ़ो नइहर
मइया केकरा के दीले असीस।
धीया बाढ़ो ससुरा, पतोह बाढ़े नइहर

३.
मइया के दुआरे हरियर पीपर
लाल धजा फहराई ए माया
मोहिनी भवानी जगतारन माया
अंचरा पसार भीख मांगेली बहुआरो देई
हमके सेनुरा भीख देई ए माया, मोहिनी भवानी
पटुका पसार भीख मांगेले कवन राम
हमके पुतवा भीख देई ए माया, मोहिनी भवानी...

४.
कहाँ रहनी ए मइया कहाँ रहनी
मइया पकवल रोटिया सेराई गइले, रउरा चरन में,
उहें रहनी उहें असी कोस के पयेंतवा
चलतऽ बटिया बिलम लगले
कहाँ रहनी ए मइया...


पराती

१.
हाथे लिहली खुरपी गड़ुअवे जुड़ पानी
चलली मदोदर रानी दावना छिरके पानी
टूटि गइले खुरपी, ढरकि गइले पानी
रोयेली मदोदर रानी, कवना छिनारी के बेटा रहलन फुलवारी
हम ना जननी ए रनिया राउरे फुलवारी
केकर घोड़वा माई रे ओएडें-गोएड़ें जाय
केकर धोड़वा माई रे सोझे दउड़ल जाए
ससुर भसुर के घोड़वा ओएड़े-गोएड़े जाय
कवना दुलहवा के घोड़वा माई रे सोझे उदड़ल जाय
रोयेली कवन सुभई मटुकवे पोंछे लोर
हँसेले कवन दुलहा, मुँहे खाले पान।

२.
मोर पिछुअरवा रे घन बंसवरिया
कोइलर बोले अनबोल,
सुतल रजवा रे उठि के बइठऽले
पसिया के पकड़ लेइ आउ रे
हँकड़हु -डँकड़हु गाँव-चकुदरवा
राजा जी के परे ला हँकार ए
कि राजा मारबि कि डांड़बि कि नग्र से उजारबि ए
नाहिं हम मारवि नाहिं गरिआइबि 
नाहिं हम नग्र से उजारबिए।
जवना चिरइया के बोलिया सोहावन,
उहे आनि देहु रे।
डाढ़ि -डाढ़ि पसिया लगुसी लगावे,
पाते -पाते कोइलर लुकासु रे,
जेहिसन पसिया रे लवले उदबास, (उदबास=बेचैनी)
मुओ तोर जेठका पूतऽ ए।
तहरा के देब चिरई सोने के पिंजड़वा
खोरन दुधवा आहार रे।
जेहिसन पसिआ रे हमें जुड़वले
जिओ तोर जेठका पुतऽ रे।

३.
हम तेहि पूछिले सुरसरि गंगा, काहे रउआ छोड़िले अरार हे।
पिया माछर मारे ला बिन रे मलहवा,
ओहि मोरा छोड़िले अरार रे।
डालावा मउरिया लेके उतरे कवन समधी,
सोरहो सिंगार ले के उतरे कवन भसुर,
ओहि मोरा ढबरल पानी।

४.
ए जाहि रे जगवहु कवन देवा, जासु दुहावन।
ए दुधवा के चलेला दहेंडिया त,
मठवा के नारी बहे।
ए हथवा के लिहली अरतिया त,
मुँह देखेली सोरही सनेही।
ए जहि रे जगवहु कवन देही, जासु दुहावन।
ए हथवा के लिहली अरतिया, त 
सोरही सनेही आरती निरेखेली ए। जाहिरे...

५.
आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मोरे अंगनवा हे,
देबऽ सतरजिया बिछाइ ए।
गाई के घीव धूम हूम कराइबि,
आकासे चली जास ए।
आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मोरे अंगनवा हे।
देबऽ सतरजिया बिछाई ए।
गाई के गोबर .. कब जग उगरिन होसु ए।
आईं ना काली माई, बइठीं मोरे अंगनवाँ हे,
देबऽ सतरजिया बिछाइ ए,
गाई के घीव धूम हम कराइबि,
कब जग उगरिन होसु हे।


पितर नेवतौनी 

ये सरगऽ में बसेले बर्हम बाबाऽ, उन्हउ के नेवतबि।
ये सरगऽ में बसेले महादेव बाबाऽ, उन्हउ के नेवतबि।

[इसी तरह ठाकुर बाबा, सुरुज, खिरलिच, काली, दुर्गा, चन्द्रमा, अछैबट सभी देवता एवं उनकी पत्नी देवी का और सभी कीड़ों-मकोड़ों का भी आवाहन किया जाता है।]

दुआरी छेंकौनी गीत

छोड़ीं-छोड़ीं सखी सबे रोकल दुआर हे
मोर दुलहा बाड़े लड़िका नादान हे।
अहिरा के जात हंउअन बोली पतिशाह हे
कइसे में छोड़ीं सखी रोकल दुआर हे
तोर दुलहा बाड़े सखी लड़िका नादान हे।

दुल्हे का उत्तर
अहिरा के जात हईं बोली पतिशाह रे 
काहे के बाबा तोर गइले पूजन रे। 
काहे के भइया तोर गइले बोलावे रे।


विदाई का गीत 

१.
खेलत रहलीं सुपली मउनिया, आ गइले ससुरे न्यार।
बड़ा रे जतन से हम सिया जी के पोसलीं, सेहु रघुवर ले-ले जाय।
आपन भैया रहतन तऽ डोली लागल जइतन, बिनु भैया डोलिया उदास।
के मोरा साजथिन पौती पोटरिया, के मोरा देथिन धेनु गाय।
आमा मोरे साजथिन पावती पोटरिया, बाबाजी देतथिन धेनु गाय।
केकरा रोअला से गंगा नदी बहि गइलीं, केकरे जिअरा कठोर।
आमाजी के रोअला से गंगाजी बहि गइलीं, भउजी के जिअरा कठोर।
गोर परूँ पइयाँ परूँ अगिल कहरवा, तनिक एक डोलिया बिलमाव।
मिली लेहु मिली लेहु संग के सहेलिया, फिर नाहीं होई मुलाकात।
सखिया -सलेहरा से मिली नाहीं पवलीं, डोलिया में देलऽ धकिआय।
सैंया के तलैया हम नित उठ देखलीं, बाबा के तलैया छुटल जाय।

२.
राजा हिंवंचल गृहि गउरा जी जनमलीं, शिव लेहले अंगुरी धराय।
बसहा बयल पर डोली फनवले, बाघ छाल दिहलन ओढ़ाय।

3
बर रे जतन हम आस लगाओल, पोसल नेहा लगाय
सेहो धिया आब सासुर जैती, लोचन नीर बहाय

जखन धिया मोर कानय बैसथिन, सखी मुख पड़ल उदास
अपन सपथ देहि सखी के बोधल, डोलिया में दिहले चढाय. लोचन नीर बहाय...

गाम के पछिम एक ठूंठी रे पाकरिया, एक कटहर एक आम
गोर रंग देखि जुनी भुलिहा हो बाबा, श्यामल रंग भगवान. लोचन नीर बहाय...


फगुआ के गीत

१.
धनि-धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो। 
लिखि लिखि चिठिया नारद मुनि भेजे, विश्वामित्र पिठायो।
साजि बरात चले राजा दशरथ, 
जनकपुरी चलि आयो, राम वर पायो।
वनविरदा से बांस मंगायो, आनन माड़ो छवायो।
कंचन कलस धरतऽ बेदिअन परऽ,
जहाँ मानिक दीप जराए, राम वर पाए।
भए व्याह देव सब हरषत, सखि सब मंगल गाए,
राजा दशरथ द्रव्य लुटाए, राम वर पाए।
धनि -धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो।

२.
बारहमासा
शुभ कातिक सिर विचारी, तजो वनवारी।
जेठ मास तन तप्त अंग भावे नहीं सारी, तजो वनवारी।
बाढ़े विरह अषाढ़ देत अद्रा झंकारी, तजो वनवारी।
सावन सेज भयावन लागतऽ,
पिरतम बिनु बुन्द कटारी, तजो वनवारी।
भादो गगन गंभीर पीर अति हृदय मंझारी,
करि के क्वार करार सौत संग फंसे मुरारी, तजो वनवारी।
कातिव रास रचे मनमोहन,
द्विज पाव में पायल भारी, तजो वनवारी।
अगहन अपित अनेक विकल वृषभानु दुलारी,
पूस लगे तन जाड़ देत कुबजा को गारी।
आवत माघ बसंत जनावत, झूमर चौतार झमारी, तजो वनवारी।
फागुन उड़त गुलाब अर्गला कुमकुम जारी, 
नहिं भावत बिनु कंत चैत विरहा जल जारी,
दिन छुटकन वैसाख जनावत, ऐसे काम न करहु विहारी, तजो वनवारी।


चहका

१.
सिया डाले राम गले जय माला, सिया डाले राम गले जय माला।
रामचन्द्र दुलहा बनि आए। दुलहा बनि आए, दुलहा बनि आए।
आरे लछुमन होऽऽ, बने सोहबाला, सिया डाले...

२.
केदली बन भौंरा रस माते, के दली बन भौंरा रस माते।
केकरा गृहे जन्मे सिया जानकी, अरे केकरा हो,
केकरा गृह में पारवती, केदली बन भौंरा रस माते। 
केइएँ विवाही सिया जानकी,
केइएँ विवाही पारबती, केदली बन भौंरा रस माते।
राजा जनक गृहे सिया जानकी, अरे राजा होऽऽ,
राजा हिवंचल के पारबती, केदली बन भौंरा रस माते।

३.
वर दऽ हो भवानी, इहे मगन हम मांगी ले।
रामचन्द्र ऐसो कंत, लखन ऐसो देवर ज्ञानी, इहे मंगन...
राजा दसरथ ऐसो सुसर, सास कोसिल्या रानी, इहे मंगन...
राजा अयोध्या सरजुग जल निर्मल पानी, इहे मंगन...

४.
तनि भरि दऽ गगरियाऽ हो श्याम कहे बृजनारि।
हमसे चढ़ा जात नाहि मोहन, जमुना ऊँच अरारी,
पाव धरत हमरो जीउ डरऽवत, 
दूजे पाव में पायल भारी, कहे बृजनारि।


जोगीरा

१.
दानापुर दरियाव किनारा, गोलघर निशानी
लाट साहेब ने किला बनाया, क्या गंगा जल पानी
जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सार रा रा।
दिल्ली देखो ढाका देखो, शहर देखो कलकत्ता।
एक पेड़ तो ऐसा देखो, फर के ऊपर पत्ता, 
जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सार रा रा।
कौन काठ के बनी खड़ौआ, कौन यार बनाया है,
कौन गुरु की सेवा कीन्हो, कौन खड़ौआ पाया,
चनन काठ के बनी खड़ौआ, बढ़यी यार बनाया हो,
हम गुरु की सेवा कीन्हा, हम खड़ौआ पाया है,
जागी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा। 

२.
किसके बेटा राजा रावण किसके बेटा बाली
किसके बेटा हनुमान जी जे लंका जारी, फिर देख चली जा। 
किसकी बेटी तारा मंदोदरी किसकी बेटी सीता ?
किसके बेटा राम-लछुमन चित्रकूट पर जीता ?
किसके मारे अर्जुन मर गए किसके मारे भीम ?
किसके मारे बालि मर गये, कहाँ रहा सुग्रीव ?


उत्तर

१. 
विसेश्रवा के राजा रावण बाणासुर का बाली
पवन के बेटा हनुमान जी, ओहि लंका के जारी 

२. 
कृष्ण मारे आर्जुन मर गए कृष्ण के मारे भीम 
राम के मारे बालि मर गए लड़ता था सुग्रीव।

३. 
कौन जिला का रहने वाला, क्या बस्ती का नाम ?
कौन जात का छोकड़ा बता तो अपना नाम ? फिर देख चली जा।
धरती माँ का जनम बता दो, कौन देव का टीका
कौन गुरु का सेवा किया, कहाँ जोगीरा सीखा ? फिर देख चली जा। 
क्या चीज का रेल बना है, क्या चीज का पहिया ?
क्या चीज का टिकट बना है, क्या चीज का रुपैया ? फिर देख चली जा।

४. 
कौन देस से राजा आया कौन देस से रानी ?
कौन देस से जोगी आया मारा उलटा बानी ? फिर देख चली जा।
काहे खातिर राजा रूसा काहे खातिर रानी ?
काहे खातिर जोगी रूसा काहे मारा बानी ? फिर देख चली जा।


प्रश्नोत्तर में जोगीरा

मित्रो भेद बताओ महावीर उस लंका के,
जो दहन किया गढ़ लंका के ना।
कवन बात पर महावीर ने भेष बनाया बन्दर का?
कितना लम्बा कितना चौड़ा पानी रहा समुन्दर का?
पूरब पच्छिम उत्तर दक्खिन था पहाड़ दशकन्धर का?
कौन तरफ से गये महावीर, भेद जो पाये अन्दर का?
विभीषण से मुलाकात हुआ कब, दिन रहा कि रात?
जाकर बजा दिया ओ डंका जो दहन किया गढ़ लंका का।
कै मिनट के अन्दर पकड़ा महावीर बलवान को?
कौन दूत ने खबर दिया था, जाकर सभा में रावन को?
उसी दूत का नाम बता दो, आज सभा में धावन को।
परी रहा कि देव रहा, कि था लड़का उ ब्राह्मन का?
पूँछ में कपड़ा कौन लपेटा, था किस निस्चर का बेटा?
फूंका घर वो पहले किसका, महावीर ने जाकर के?
नर -नारी सब जले थे कितने बताओ तू गा करके?
रहा कौन समय ओ बेरा, उसने पूंछ कै दफे फेरा?
गुजरा कै दिन शंका का, जो दहन किया गढ़ लंका का।
गोरे काले मरे थे कितने, बिगे गये उठा करके?
हिसाब करके जरा बता दो आज हमें समझा करके।
किस जंगल की थी वो लकड़ी गदा बना बलधारी का?
उस बढ़ई का नाम बताओ काम किया मिनकारी का?
वजन बता दो उस गदा का महावीर बलधारी का।
कहे शिवनन्दन खोलो भेद, दिल से हटाकर संका का।
जो दहन किया था लंका का।


वनिक 

मैं हूँ साहुकारा नाथ, कीजिए हमारा सौदा,
छोटी बड़ी इलायची, छुहड़ा घर भरा है।
लवंग ओ सुपारी, कत्था केवरा सुवास भरो,
बांका है मुनक्का, जो डब्बे में रक्खा है।
किसमिस बादाम, ओ चिरंजी तमाम रक्खी,
गड़ी का है गोला साँचे का सा ढ़ला है।
सोंठ जीरा जायफल डिब्बे में कपूर देखो,
काली मीर्च पीपली चालान नयी आयी है।
हरदी हरीत के ठंढई भी ढेर रक्खी,
धनिया मसाला सब आला दरसाई है।
कहे अभिलाख लाल लीजिए मखाना पिस्ता,
दीजिए न दाम, दास चरणों पर पड़ा है।


श्रमिक बोल 

१.
बोली-बोलऽ, चोली खोलऽ, 
चोली के भीतर, लाल कबूतर, 
खाए के मांगे, सबुज दाना, 
धर-धर लेइयें पर, पांजर मोटा, 
खइबऽ सोटा, धर धरेसी, 
ध के पेसी, पेसन वाला, 
है मतवाला, ढिलवा भैया, 
करे ढिलाई, ओकर मउगी, करे सगाई।

२.
हाथ भरो जी - हैसा,
जोर करो जी - हैसा,
जोर जुगुती - हैसा, 
हो छुट्टी - हैसा,
छुट्टी होना - हैसा, 
मौज उड़ाना - हैसा, 
मौजेदारी - हैसा, 
साव मदारी - हैसा, 
घाम-घमैला- हैसा।


रजमतिया के चिट्टी

छोटकी गोतिनिया के तनवा के बतिया,
पतिया रोई-रोई ना, लिखावे रजमतिया।
सोस्ती श्री चिट्टी रउरा भेजनी तेमे लिखल,
सोरे पचे अस्सी रोपेया, भेजनी तवन मिलल
ओतना से नाही कटी, भारी बा बिपतिया। पतिया...
छोटकी के झूला फाटल, जेठकी के नाहीं,
बिटिया सेयान भइल, ओकरो लूगा चाही,
अबगे धरत बाटे कोंहड़ा में बतिया, पतिया ...
रोज -रोज मंगरा मदरसा जाला,
एक दिन तुरले रहे मौलवी के ताला,
ओकरा भेंटाइल बा करीमना संघतिया। पतिया...
पांडे जी के जोड़ा बैला गइलेसऽ बिकाइ,
मेलवा में गइले त पिलवा भुलाइल,
चार डंडा मरले मंगरू, भाग गइल बेकतिया। पतिया...
जाड़ा के महीना बा, रजाई लेम सिआइ,
जाड़ावा से मर गइल दुरपतिया के माई,
बड़ा जोर बीमार बा भिखारी काका के नतिया। पतिया...
कबरी बकरिया रात-भर मेंमिआइल,
छोटका पठरुआ लिखीं कतना में बिकाई,
दुखवा के परले खिंचत बानी जँतिया। पतिया...


रमजनिया का दुखड़ा

रोई-रोई कहतिया बुढ़िया रमजनिया,
का कहीं ए बाबा आपन दुख के कहनियाँ।
जेठवा बेटउआ के कइनी सगाई,
अइसन बिआ मिलल दुलहिनिया भेटाइल,
खटिया पर पानी ध के माँगे ले भोजनिया। का कहीं...
कबो उहो घरवा में झाड़ू ना लगावे,
दिनभर भतरा के मुँहवे निहारे,
भतरे के किरिया खाले मोर दुलहिनिया। का कहीं...


धोबी के गीत

कवना पोखरवा में झिलमिल पनिया कि कवना पोखरवा सेवार,
कवना पोखरवा में चेल्हवा मछरिया कि केहो बिगे महाजाल।
राम पोखरवा में झिलमिल पनिया कि लछुमन पोखरवा सेवार,
सीता पोखरवा में चेल्हवा मछरिया कि रावन फेंके महाजाल।
लाल घोड़वा पर लाल चढ़ि अइले कि उजर घोड़वा भगवान,
सोने पलकिया में सीता चढ़ि अइली कि चँवर डोलावे हनुमान।


मथुरा के लोगवा 

आवत है नन्दलाल के हाथी, तूरत डार मीरोरत छाती,
ए नन्दलाल धका जनि दीहऽ धुक्की जनि दीहऽ।
मथुराजी के लोगवा बड़ा रगरी, फेरत है सिर के गगरी,
भींजत है लहँगा चुनरी, बान्हत है टेढ़का पगरी।


मुरली 

हमार मुरली भइल बा चोरी, मुरलिया दिलाइ दऽ ए भाई।
सूतल रहलीं कदम के छैयां धर बंसी सिरहानी,
एतने में आ गइल निदिया बैरी, हो गइल मुरली के हानी,
मुरलिया दिलाइ दऽ ए भाई।
ओहि मुरली में प्राण बसल बा छछन जिअरवा मोरी,
जैसे हम हईं तोहरो दुलरुआ ओइसहीं मुरलिया मोरी,
मुरलिया दिखलाइ दऽ ए भाई।


एके कोखी बेटा जन्मे एके कोखी बेटिया

एके कोखी[1] बेटा जन्मे एके कोखी बेटिया
दू रंग नीतिया[2]
काहे कईल[3] हो बाबू जी
दू रंग नीतिया 

बेटा के जनम में त सोहर गवईल अरे सोहर गवईल[4]
हमार बेरिया, काहे मातम मनईल हमार बेरिया[5]

दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया

बेटा के खेलाबेला[6] त मोटर मंगईल अरे मोटर मंगईल
हमार बेरिया, काहे सुपली मऊनीया[7] हमार बेरिया

दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया

बेटा के पढ़ाबेला[8] स्कूलिया पठईल अरे स्कूलिया पठईल[9]
हमार बेरिया, काहे चूल्हा फूँकवईल हमार बेरिया

दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया

बेटा के बिआह में त पगड़ी पहिरल[10] अरे पगड़ी पहिरल
हमार बेरिया, काहे पगड़ी उतारल[11] हमार बेरिया

दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी
दू रंग नीतिया

एके कोखी बेटा जन्मे एके कोखी बेटिया
दू रंग नीतिया
काहे कईल हो बाबू जी दू रंग नीतिया

शब्दार्थ:
↑ कोख से पैदा
↑ दुरंगी नीति
↑ क्यों किया
↑ सोहर गीत गवाए
↑ हमारी बारी में
↑ खेलने के लिए
↑ सूप और डलिया
↑ पढ़ाने के लिए
↑ स्कूल भेजा
↑ पगड़ी पहनी
↑ पगड़ी उतारी


मति करऽ राम वियोग

मति करऽ राम वियोग सिया हो, मति करऽ राम वियोग।

सुतल रहनी कंचन भवन में, सपना देखली अनमोल।
सिया हो मति करऽ राम वियोग।
अमृत फल के बाग उजरले राम लखन के दूत।
सिया हो मति करऽ राम वियोग।
पूरी अयोध्या से दोउ बालक अइले, एक सांवर एक गोर।
सिया हो मति करऽ राम वियोग।
बाग उजरले लंक जरवले, दिहले समुंदर बोर।
सिया हो मति करऽ राम वियोग।


मैं ना जीओं बिनु राम

मैं ना जीओं बिनु राम हो जननी, मैं ना जिओं बिनु राम।
राम जइहें संग हमहु जाएब,
अवध अइहें कवन काम जननी हो, मैं ना जीओं बिनु राम।
राम लखन दुनो वन के गवनकिन,
नृपति गयो सुरधाम, मैं न जीओं बिनु राम।
भूख लगी तहाँ भोजन बनैहों, प्यास लगी तहँ पानी
नींद लगी तहँ सेज लगैहों, चरण दबैहों सुबह-साम,
मैं न जीओ बिनु राम।




अमवा के लागेला टकोरवा रे संगिया
अमवा के लागेला टकोरवा रे संगिया
गूलर फरे ले हड़फोर
गोरिया के उठेलाहा छाती के जोबनवाँ
पिया के खेलवना रे होइ

भावार्थ
'आमों के टिकोरे लग गए, ओ संगी ! गूलर भी हड्डियों को फोड़कर फलों से लद गए हैं गोरी के उरोज भी उभर आए हैं अरे ये तो प्रियतम के लिए खिलौने बनेंगे !'



हाथ में मेहंदी मांग सिन्दूरवा 

हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा
बर्बाद कजरवा हो गइले
बाहरे बलम बिना नींद ना आवे
बाहरे बलम बिना नींद ना आवे
उलझन में सवेरवा हो गइले

बिजुरी चमके देवा गर्जे घनघोर बदरवा हो गइले
पापी पपीहा बोलियाँ बोले पापी पपीहा बोलियाँ बोले
दिल धड़के सुवेरवा हो गइले
बाहरे बलम बिन नींद न आवे
उलझन में सुवेरवा हो गइले
आ...................................

अरे पहिले पहिले जब अइलीं गवनवा
सासू से झगड़ा हो गइले
बाकें बलम पर...अहा अहा
बांके बलम परदेसवा विराजें
उलझन में सुवेरवा हो गइले

हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा
बर्बाद कजरवा हो गइले


बलम मति जइयह 

बलम मति जइयह... अ... बिदेसवा न... 
सजन हम कइसे जियब...
पिया हम जी-जी मरब...
न हमके सतइयह...
बलम मति जइयह...
सजन जनि जइयह...
बिदेसवा न... अ...


मोरे जोबना में

मोरे जोबना में दुइ-दुइ अनार...
हे सइयाँ... अ... दूनों तोहार...
भगवान किरिया... सियाराम किरिया...


छलकल गगरिया रे

छलकल गगरिया रे मोर निरमोहिया
छलकल गगरिया मोर

बिरही मोरनियाँ मोरवा निहारे
पापी पपिहरा पिउ-पिउ पुकारे
पियवा गइल कउनी ओर निरमोहिया
छलकल गगरिया मोर... कि... छलकल गगरिया मोर


कइलीं हम कवन कसूर

कइलीं हम कवन कसूर... नयनवाँ से... नयनवाँ से
नयनवाँ से दूर कइल... आ बलमूँ...
नयनवाँ से दूर... नयनवाँ से दूर... नयनवाँ से दूर कइल... 
आ बलमूँ...

गुन-ढंग रहल नीक औ सुरतियो रहल ठीक
त काहें हम्में दूर कइल... आ... बलमूँ...
नेकनामी में त... अ...नाहीं... बदनामी में जरूर
गाँव भर में हम्में मशहूर कइल... आ बलमूँ...
कइलीं हम कवन कसूर...



मजूरी कई के

मजूरी कइ के
हम मजूरी कइ के...
जी हजूरी कइ के...
अपने सइयाँ के... अपने बलमाँ के पढ़ाइब
हम मजूरी कइ के...
जी हजूरी कइ के...

रात-दिन खटिबे
काम सब करिबे
कुल-कानि लइ के
भला का करिबे
तन अंगूरी कइ के
मन सिन्दूरी कइ के
सिच्छा पूरी हम कराइब
अपने राजा के... अपने बाबू के... 
अपने राजा के पढ़ाइब

हम मजूरी कइ के...
जी हजूरी कइ के... हम मजूरी कइ के...


कैसे कटी जिनगी हमार

कइसे कटी जिनगी हमार
दई हो का हम कइलीं तुहार कि दु:ख हमें दे
दिहल..अ...
कि सुख मोर ले लिहल... अ... अ..
चारों तरफ भईंल अन्हार
हे सिरजनहार लगा द पार कि बड़ा दु:ख दे दिहल... अ...


नक्बेसर कागा ले भागा
नक्बेसर कागा ले भागा
अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,

उड उड कागा मोरी बिंदिया पे बैठा...बिंदिया पे बैठा.
अरे मोरे माथे का सब रस ले भागा,नक्बेसर कागा ले भागा
अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,

उड उड कागा मोरे नथुनी पे बैठा अरे नथुनी पे बैठा.
मोरे होंठ्वा का सब रस ले भागा,
नक्बेसर कागा ले भागा
अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,नक्बेसर कागा ले भागा
अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,

उड उड कागा मोरे चोलिया पे बैठ, अरे चोलिया पे बैठा....
अरे जुबना का सब रस ले भागा, अरे जोबना का सब रस ले भागा
नक्बेसर कागा ले भागा
अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,
उड उड कागा मोरे करधन पे बैठा अरे साये पे बैठा,
अरे मेरी बुरीयो का सब रस ले भागा मोरा
अरे नक्बेसर कागा ले भागा
अरे मोरा सैंयां अभागा ना जागा,



रामलाल क फगुवा

रचनाकार: कैलाश गौतम

पहिले पहिले फगुवा खेलै रामलाल ससुरारी चललैं
रुपया प‍इसा कपड़ा लत्ता कै के खूब तैयारी चललैं
लेहलैं नया सरौता, बटुआ, कत्था, खड़ी सोपारी लेहलैं
मेहर खातिर साबुन, पौडर, साया, ब्लाउज, सारी लेहलैं
अपने खातिर लुंगी, जूता, बीड़ी अउर सलाई लेहलैं
कई दुकानी चीख-चीख के आधा किलो मिठाई लेहलैं
हाथ गाल पर फेरै लगलन सोचै अ‍उर विचारै लगलन
आस पास सैलून कहाँ हौ चारो ओर निहारै लगलन
बनल ठनल एक औरत ल‍उकल खोंखैं अ‍उर खंखारै लगलन
इसकूटर पर ममा देख‍इलन बढ़के ममा पुकारै लगलन
नाहीं सुनलैं ममा भीड़ में नाहीं त बतियवले होतन
पुछले होतन हाल घरे क आपन हाल बतवले होतन
नाँहीं-नाँहीं लाख कहित हम तब्बौ चाह पियवले होतन
अपने इसकूटर पर हम्मैं बस अड्डा पहुँचवले होतन
सुनले हई शहर में मम्मा मामी नई लियायल ह‍उअन
बड़की मामी गांव रहैले ओकरे पर गुस्सायल ह‍उअन
रामलाल अब सरसमान कुल झोरा में सरियावै लगलन
साबुन पौडर लुंगी जूता खोंसै अ‍उर दबावै लगलन
बस से चली कि रेकसै अच्छा जोड़ै अ‍उर दहावै लगलन
सोझैं खाली रेकसा ल‍उकल ’हे रेकसा’ गोहरावै लगलन
बस से जाये क मतलब हौ पैदल ढेर चलै के होई
रेकसा से सीधे दुआर पर कत्तौं ना उतरै के होई
का हो रेकसा पूरे चलबा सोचा मत बस बोला जनला
रेकसोवाला हँस के कहलस लेला उड़नखटोला जनला
एतना जल्दी तोहके पूरे अब क‍इसे पहुँचाई हम
हमहूँ हई अदमिये मालिक गरुड़ देवता नहीं हम
ज‍इसे त‍इसे घंटा भर में रेकसा पार शहर के निकलल
चारों ओरी जाम बेचारा चढ़ के कहीं उतर के निकलल
मुँह पर डूबत बेर देख के रामलाल घबराये लगलन
रेकसावाले पर रह रह के पिन्नाये भन्नाये लगलन
एसे तेज चली ना हमसे जल्दी हो त खुदै चलावा
आजिज आ के रामलाल तब कहलन अच्छा ब‍इठा आवा
बारी-बारी दूनों जाने बइठै अ‍उर चलावै लगलन
एतना गड़बड़ रस्ता सरवा रामलाल गरियावै लगलन
पाहुन अ‍इलैं पाहुन अ‍इलैं घर द‍उरल अगवानी खातिर
केहू तोसक तकिया खातिर केहू मीठा पानी खातिर
रामलाल क मेहर अपने भ‍उजी से बतियावत ह‍उवै
पैदल त ई चलै न जानै अस सुकुआर बतावत ह‍उवै
रेकसावाला मुसकियात हौ रामलाल त हाँफत ह‍उवैं
गौर से उनके सब देखत हौ ऊहो सब के भाँपत ह‍उवैं
हँस के बोलल चाहत हउवन लेकिन हँसी न आवत ह‍उवै
अ‍इसैं मिलै सवारी मालिक रेकसावान मनावत ह‍उवै
घर में चाह पियै के खातिर रामलाल बलवावल गइलन
निखरहरै खटिया पर बिच्चे अंगना में बईठावल ग‍इलन
भरमूंहे सब रंग लगवलस जमके भूत बनावल ग‍इलन
साली करै चिकारी सटके सरहज गावै गारी बबुआ
बबुई त ससुरारी ग‍इलिन तू अ‍इला ससुरारी बबुआ
रामलाल निखरहरै खटिया फोंय फोंय फुफ्कारै लगलन
हमरे नियर चलावा रेकसा सपनै में ललकारै लगलन॥


पातर-पातर गोरिया के पतरी कमरिया 

रचनाकार: महेन्द्र मिसिर

पातर-पातर गोरिया के पतरी कमरिया
मोर सँवरिया रे पतरी डगरिया धैले जाय
पातर लप-लप गोर पतरी अंगुरिया
मोर सँवरिया रे लचकत पनिया के जाय
सड़िया के आरी-आरी गोटवा के जारी
मोर सँवरिया रे मटकत रहिया के जाय
गावेले महेंदर मिसिर दूहो रे पुरुबिया
मोरे सँवरिया रे, देखते में जिया ना अघाय।


हमनी के रहब जानी दूनू हो परानी

हमनी के रहब जानी दूनू हो परानी
अंगना में कींच-काँच दुअरा पर पानी
खाला ऊँचा गोर पड़ी चढ़ल बा जवानी
देश-विदेश जाल‍ऽ टूटही पलानी
केकरा पर छोड़के जालऽ टूटही पलानी
कहत महेंदर मिसिर सुनऽ दिलजानी
केकरा से आग मांगब, केकरा से पानी!


सासु मोरा मारे राम बाँस के छिऊकिया

रचनाकार: महेन्द्र मिसिर 

सासु मोरा मारे राम बाँस के छिऊकिया

मोर ननदिया रे सुसुकत पनिया के जाय
छोटे-मोटे पातर पियवा हँसि के ना बोले
मोर ननदिया रे से हू पियवा कहीं चलि जाय
गंगा रे जमुनवा के चिकनी डगरिया
मोर ननदिया रे पैयाँ धरत बिछलाय
कहत महेंदर श्याम इहो रे पुरुबिया
मोर ननदिया रे पिया बिनु रहलो ना जाय


छिंगुनिया के छल्ला 

रचनाकार: प्रतिभा सक्सेना 

छिंगुनिया के छल्ला पे तोहि का नचइबे ,
नथुनियाँ, न झुलनी, न मुँदरी जुड़ी ,
आयो लै के कनैठी अंगुरिया को छल्ला !
इहै छोट छल्ला पे ढपली बजइबे !

कितै दिन नचइबे ,गबइबे ,खिजइबे
कसर सब निकार लेई ,फिन मोर लल्ला
कबहुँ गोरिया तोर पल्ला न छोड़ब ,
चिपक रहिबे बनिके तोरा पुछल्ला !

करइ ले अपुन मनमानी कुछू दिन
उहै छोट लल्ला तुही का नचइबे !

भये साँझ आवै दुहू हाथ खाली
जिलेबी के दोना न चाटन के पत्ता ,
मेला में सैकल से जावत इकल्ला ,
सनीमा के नामै दिखावे सिंगट्टा !
हमहूँ चली जाब देउर के संगै
उहै ऊँच चक्कर पे झूला झुलइबे !

काहे मुँहै तू लगावत सबन का
लगावत हैं चक्कर ऊ लरिका निठल्ला !
उहाँ गाँव माँ घूँघटा काढ रहितिउ ,
इहाँ तू दिखावत सबै मूड़ खुल्ला !
न केहू का हम ई घरै माँ घुसै देब ,
चपड़-चूँ करे तौन मइके पठइबे !

लरिकन को किरकट दुआरे मचत ,
मोर मुँगरी का रोजै बनावत है बल्ला ,
इहाँ देउरन की न कौनो कमी
मोय भौजी बुलावत ई सारा मोहल्ला !
छप्पन छूरी इन छुकरियन में छुट्टा
तुहै छोड़, कहि देत, मइके न जइबे !

मचावत है काहे से बेबात हल्ला ,
अगिल बेर तोहका चुनरिया बनइबे ,
पड़ी जौन लौंडे-लपाड़न के चक्कर
दुहू गोड़ तोड़ब घरै माँ बिठइबे !
छिंगुनियाके छल्ला पे ...!




रेलिया बैरन पिया को लिये जाये रे

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे,
रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे ।

जौन टिकसवा से बलम मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें,
पानी बरसे टिकस गल जाए रे, रेलिया बैरन ।।

जौने सहरिया को बलमा मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें,
आगी लागै सहर जल जाए रे, रेलिया बैरन ।।

जौन सहबवा के सैंया मोरे नौकर, रे बलमा मोरे नौकर,
गोली दागै घायल कर जाए रे, रेलिया बैरन ।।

जौन सवतिया पे बलमा मोरे रीझे, रे सजना मोरे रीझें,
खाए धतूरा सवत बौराए रे, रेलिया बैरन ।।
रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे ।

जौन टिकसवा से बलम मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें,
पानी बरसे टिकस गल जाए रे, रेलिया बैरन ।।

जौने सहरिया को बलमा मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें,
आगी लागै सहर जल जाए रे, रेलिया बैरन ।।

जौन सहबवा के सैंया मोरे नौकर, रे बलमा मोरे नौकर,
गोली दागै घायल कर जाए रे, रेलिया बैरन ।।

जौन सवतिया पे बलमा मोरे रीझे, रे सजना मोरे रीझें,
खाए धतूरा सवत बौराए रे, रेलिया बैरन ।।


सेन्दुर सम्भाल के उथईहा ए सुन्दर बर 

सेन्दुर सम्भाल के उथ ईहा ए सुन्दर बर
सेन्दुर सम्भाल के उथईहा ए सुन्दर बर ।
माता पिता कन्यादान तोह्के कैले हो
आंखी के पुतरी बनैहा ए सुन्दर बर ।
मात पिता अपनी प्यारी बिटिउआ के
आंखी के पुतरी बनैहा ए सुन्दर बर ।

हरे हरे हरे दादा बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो
हरे हरे हरे दादा बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो
ऊँचे-ऊँचे मडउवा तले बैठिह हो दादा, सजन लोग छेकले दुवार हो

हरे हरे हरे नाना बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊ~मचे मडवा छवइहा हो
ऊँचे-ऊँचे मडउवा तले बैठिह हो नाना, सजन लोग छेकले दुवार हो

हरे हरे हरे बाबा बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो
ऊँचे-ऊँचे मडउवा तले बैठिह हो बाबा, सजन लोग छेकले दुवार हो

हरे हरे हरे चाचा बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो
ऊँचे-ऊँचे मडउवा तले बैठिह हो चाचा, सजन लोग छेकले दुवार हो

हरे हरे हरे मामा बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो
ऊँचे-ऊँचे मडउवा तले बैठिह हो मामा, सजन लोग छेकले दुवार हो

हरे हरे हरे भैया बसवा कटइहा, ऊँचे-ऊँचे मडवा छवइहा हो
ऊँचे-ऊँचे मडउवा तले बैठिह हो भैया, सजन लोग छेकले दुवार हो


विवाह गीत
१.
काहे को ब्याहे बिदेस अरे सुन बाबुल मोरे
मैं बाबुल तोरे आंगन की पंक्षी
फ़ुदक फ़ुदक उड़ि जाउं रे
सुन बाबुल मोरे

मैं बाबुल तोरे आंगन की गंइया
जहां बांधो, बंध जाऊं रे
सुन बाबुल मोरे

चार बरस पहले गुड़िआ छोड़ा
छुटा बाबुल तोरा देस रे
सुन बाबुल मोरे

जाई डोली पहूंचि अवधपुर
छूटा जनक तोरा देस रे
सुन बाबुल मोरे

२.
सेनुरा बरन हम सुन्दर हो बाबा, इंगुरा बरन चटकार हो
मोतिया बरन बर खोजिहा हो बाबा, तब होइ हमरा बियाह हो
ताल सुखीय गईले पोखरा सुखीय गईले, इनरा परे हाहाकार हो
बेटी के बाबुजी के दलकी समा गईले कईसे में होईहे बियाह हो
जाई ना बाबा अवधपुर नगरिया राजा दशरथ के दुआर हो
राजा दशरथ के चार बेटवा, चारु सं बाड़े कुंवार हो
चार भईया में सुन्दर बर सांवर उनके के तिलक चढ़ाव हो
ताल भरीय गईले पोखरा भरीये गईले इनरा पर परे झझकार हो
बेटी के बाबुजी के खुसिया समा गईल, अब होईहे धर्म बियाह हो.

हमारे समाज में हर रश्म के लिये गीत हैं और ये गीत ऐसे ही नहीं हैं. ये अपने समाज और अपनी परंपरा से जुड़े हुएं हैं. इनका स्रोत पौराणिक संदर्भ और प्राण लोक जीवन है.
संकलन- रीता मिश्र


बाबा कवने नगरिया जुआ खेललऽ 

बाबा कवने नगरिया जुआ खेललऽ
कि हमरा के हारि अ‍इलऽ, हमरा के हारि ह‍इलऽ

बेटी अवध नगरिया जुआ खेललीं तऽ
तोहरा के हारि अ‍इलीं, तोहरा के हारि अइलीं ।

बाबा कोठिया-अँटरिया काहे ना हरलऽ
कि हमरा के हारि अ‍इलऽ, हमरा के हारि ह‍इलऽ 

बेटी कोठिया-अँटरिया हमार लछिमी तऽ
तू हऊ पराया धन तू हऊ पराया धन ।

बाबा भैया-भ‍उज‍इया काहें ना हरलऽ
कि हमरा के हारि अ‍इलऽ, हमरा के हारि ह‍इलऽ

बेटी पुतवा-पतोहिया हमार लछिमी तऽ
तू हऊ परायाधन-तू हऊ परायाधन ।

बाबा ग‍इया-भँइसिया काहे न हरल कि
कि हमरा के हारि अ‍इलऽ, हमरा के हारि ह‍इलऽ

बेटी ग‍इया-भँइसिया हमार लछिमी तऽ
तू हऊ पराया धन तू हऊ पराया धन ।

भावार्थ :
यह विवाह-गीत है । लड़की अपने पिता से पूछती है कि बाबा! आप किस नगर में जुआ खेल कर आ रहे हैं जहाँ आप मुझे हार आए हैं? पिता कहता है कि मैं अयोध्या (जिस जगह लड़की की शादी हो रही है उस गाँव या शहर का नाम यहाँ जोड़ दिया जाता है) में जुआ खेलने गया था और हे बेटी! वहीं पर तुम्हेम हार आया । पुत्री कहती है कि बाबा! आपके पास तो बड़ी सम्पत्ति थी। महल कोटे अटारियाँ थीं । इन्हें आपने दाँव पर क्यों नहीं लगाया ? इन्हें हारना चाहिए था आपको। आप मुझे ही क्यों हार आए? पिता का जवाब यह है कि ये सारी सम्पदा मेरी लक्ष्मी है, मैं उन्हें क्यों हारता ! तब बेटी कहती है कि घर में से अगर किसी को हारना ही था तो भैया-भाभी भी तो थे? आख़िर आपने उन्हें दाँव पर क्यों नहीं लगाया? जनक का उत्तर यह होता है कि पुत्र-पुत्रवधू तो मेरे अपने हैं । हे बेटी तू पराया धन है इसलिए तुम्हे मैं हार आया । आगे तुम्हारी क़िस्मत । मैं अपना धन कैसे हारता ? ये हारने या जुए में लगाने की वस्तु नहीं हैं । बेटी कहती है कि हे पिता, क्या मैं तुम्हारी गाय-भैंसों से भी गई-गुज़री हूँ कि तुम उन्हें हारकर आने की जगह मुझे हार आए और वह रोती हुई विजेता के खूँटे पर बँधने के लिए विदा कर दी जाती है।


छठ गीत : केलवा जे फरये ला घवद से ओहपर

केलवा जे फरये ला घवद से ओहपर सुगा मंडराय
उ जे खबरी जनइबो अदित्य से सुगा दिहले झुठीयाय
उ जे मरबउ रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरुछाय
सुगनी जे रोवय वियोग से आदित्य होऊ न सहाय

नारियलवा जे फरये ला घवद से ओहपर सुगा मंडराय
उ जे खबरी जनइबो अदित्य से सुगा दिहले झुठीयाय
उ जे मरबउ रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरुछाय
सुगनी जे रोवय वियोग से आदित्य होऊ न सहाय

अमरुदवा जे फरये ला घवद से ओहपर सुगा मंडराय
उ जे खबरी जनइबो अदित्य से सुगा दिहले झुठीयाय
उ जे मरबउ रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरुछाय
सुगनी जे रोवय वियोग से आदित्य होऊ न सहाय



चौथ चन्दा गीत
चौथ (भाद्र शुदी चौथ) के दिन गणेश-पूजा के दिन स्कूली बच्चों द्वारा गाया जाने वाला चौथ चंदा गीत। भाद्रसुदी चौथ को स्कूली बच्चे गुरूजी के साथ समूह में प्रत्येक विद्यार्थी के घर लकड़ा बजाते और इन गीतों को गाते हुए जाते हैं। विद्यार्थी के माता-पिता विदाई में अन्न, वस्त्र और द्रव्य देते हैं, उसे लाकर स्कूल में जमा किया जाता है, वस्त्र गुरूजी को दे दिया जाता है; अन्न-द्रव्य से स्कूल में भोज का आयोजन होता है, जिसमें गुरूजी के साथ सभी बच्चे भाग लेते हैं। यह प्रथा अब गाँव के स्कूलों में दिखाई नहीं पड़ती।
१.
खेलत खेलत एक कउड़ी पवनी
उ कउड़ी गंगा दहवऽली
गंगा मुझको बालू दिया, उ बालू गोड़िनिया लिया।
गोड़िनिया मुझको भार दिया, उ भार घसवहा लिया।
घसवहा मुझको घास दिया, उ घास गैया लिया।
गइया मुझको दूध दिया, उ दूध बिलैया लिया।
बिलइया मुझको चूहा दिया, उ चूहा चिल्होरिया लिया।
चिल्होरिया मुझको पाँख दिया, उ पाँख राजा लिया।
राजा मुझको घोड़ा दिया।

२.

रामजी चले लछुमनजी चले, महावीरजी चले, लंका दाहन को।
तैंतीस कोट प्रदुम्न चले, जैसे मेघ चले बरिसावन को।
का करिहें उत्पात के नन्दन, का करिहें तपसी दोनों भइया।
मार दिहें उत्पात के नन्दन, काटि दिहें तपसी दोनों भइया।

३.

सूर्यकुल वंशवा में जन्म लिहले रामचन्द्र,
कोशिला के कोख अवतार रे बटोहिया।

४.

एक मती हरताल ताला, जहाँ पढ़ावे पंडित लाला।
पंडित लाला दिये असीस, जीओ बचवा लाख बरीस।
लाख बरीस की उमर पाई, दिल्ली से गजमोती मंगाई।
आव रे दिल्ली, आजम खाँव। आजम खाँव चलाया तीर, बचा कोई रहा न वीर।
जय बोलो जय रामा रघुवर, सीता मैया करे रसोइया
जेवें लछुमन रामा, ताहि के जूठन काठन पा गया हनुमाना।
सोने के गढ़ लंका ऊपर कूद गया हनुमाना।

५.

बबुआ हो बबुआ, सिताब लाल बबुआ
बबुआ के माई बड़ा हई दानी,
लइकन के देख-देख भागे ली चुल्हानी।
घर में धोती टांगल बा,
बाकस में रुपेया कूदऽ ता
घर में धरबू चोर ले जाई
गुरुजी के देबू, नाम हो जाई।
बबुआ आँख मुनौना भाई,
बिना किछु लेहले चललऽ ना जाई।

६.

छाते थे भाई छाते थे,
छाते-छाते भूख लगी।
अनार की कलियाँ तोड़ लिया, बंगाली का छोकड़ा देख लिया।
धर टाँग पटक दिया, रोते-रोते घर गया।
घर का मालिक दौड़ा आया, दिल्ली-कोस पुकारते आया।
आव रे दिल्ली-आजम खाँव, आजम खाँव चलाया तीर,
बचा कोई रहा न वीर।
थर-थर काँपे जमुनापुरी,
जमुनापुरी से आया वीर, मार गया दो छैला तीर।
छैला मांगे एक छलाई, दिल्ली से गजमोती मंगाई।

७.

एक दिन सतराजीत के भाई, पहुँचे वन में जाई।
वहाँ भादो का बहार दिखलाए हुए थे
करते -करते शिकार, खुद बन गए शिकार
हाथी -घोड़ा से भी साज वे सजाए हुए थे।
सुनकर जामवन्त गुर्राया, उनको क्रोध और चढ़ि आया।
पहले बातों से बहलाए, वह शर्माए हुए था।
भारी होने लगी लड़ाई, जामवन्त को बात याद जब आई
हमको दर्शन देने आज रघुराई आए थे।



नवमी गीत

१.
हमरा शीतलऽ मइया बड़ दुलरी,
मइया बड़ दुलरी मइया डोला चढ़ि आवेली हमार नगरी।
जाउ हम जनतीं अइहें हमार नगरी (जाउ=यदि)
मइया डगर बहरतीं दहिनवें अंचरी।

२.
नीमिया के डाढ़ मइया गावेली हिंडोलवा कि झूलि-झूलि ना।
झूलतऽ झूलतऽ मइया के लगली पिअसिया कि चलि भइली ना
मलहोरिया दुआर, मइया चलि भइली ना
सुतल बाड़े कि जागल रे मलिया
बूँद एक आहि के पनिया पिआव कि बूँद एक
कइसे में पनिया पिआईं मैया
कि बालका तोहार मोरे गोद
लेहु नाहि मालिनी बालका, सुताव सोने के खटोलवा कि बूँद एक
मोहिके पनिआ पिआव।
एक हाथ लेहली मालिन झँझरे गड़ुअवा
दोसरे हाथ सिंहासन 
जइसन मालिन हमरे जुड़वलू ओहिसन पतोहिया जुड़ास,
धिअवा जुड़ास धीया बाढ़ो ससुरे, पतोह बाढ़ो नइहर
मइया केकरा के दीले असीस।
धीया बाढ़ो ससुरा, पतोह बाढ़े नइहर

३.
मइया के दुआरे हरियर पीपर
लाल धजा फहराई ए माया
मोहिनी भवानी जगतारन माया
अंचरा पसार भीख मांगेली बहुआरो देई
हमके सेनुरा भीख देई ए माया, मोहिनी भवानी
पटुका पसार भीख मांगेले कवन राम
हमके पुतवा भीख देई ए माया, मोहिनी भवानी...

४.
कहाँ रहनी ए मइया कहाँ रहनी
मइया पकवल रोटिया सेराई गइले, रउरा चरन में,
उहें रहनी उहें असी कोस के पयेंतवा
चलतऽ बटिया बिलम लगले
कहाँ रहनी ए मइया...



पराती 

१.
हाथे लिहली खुरपी गड़ुअवे जुड़ पानी
चलली मदोदर रानी दावना छिरके पानी
टूटि गइले खुरपी, ढरकि गइले पानी
रोयेली मदोदर रानी, कवना छिनारी के बेटा रहलन फुलवारी
हम ना जननी ए रनिया राउरे फुलवारी
केकर घोड़वा माई रे ओएडें-गोएड़ें जाय
केकर धोड़वा माई रे सोझे दउड़ल जाए
ससुर भसुर के घोड़वा ओएड़े-गोएड़े जाय
कवना दुलहवा के घोड़वा माई रे सोझे उदड़ल जाय
रोयेली कवन सुभई मटुकवे पोंछे लोर
हँसेले कवन दुलहा, मुँहे खाले पान।

२.
मोर पिछुअरवा रे घन बंसवरिया
कोइलर बोले अनबोल,
सुतल रजवा रे उठि के बइठऽले
पसिया के पकड़ लेइ आउ रे
हँकड़हु -डँकड़हु गाँव-चकुदरवा
राजा जी के परे ला हँकार ए
कि राजा मारबि कि डांड़बि कि नग्र से उजारबि ए
नाहिं हम मारवि नाहिं गरिआइबि 
नाहिं हम नग्र से उजारबिए।
जवना चिरइया के बोलिया सोहावन,
उहे आनि देहु रे।
डाढ़ि -डाढ़ि पसिया लगुसी लगावे,
पाते -पाते कोइलर लुकासु रे,
जेहिसन पसिया रे लवले उदबास, (उदबास=बेचैनी)
मुओ तोर जेठका पूतऽ ए।
तहरा के देब चिरई सोने के पिंजड़वा
खोरन दुधवा आहार रे।
जेहिसन पसिआ रे हमें जुड़वले
जिओ तोर जेठका पुतऽ रे।

३.
हम तेहि पूछिले सुरसरि गंगा, काहे रउआ छोड़िले अरार हे।
पिया माछर मारे ला बिन रे मलहवा,
ओहि मोरा छोड़िले अरार रे।
डालावा मउरिया लेके उतरे कवन समधी,
सोरहो सिंगार ले के उतरे कवन भसुर,
ओहि मोरा ढबरल पानी।

४.
ए जाहि रे जगवहु कवन देवा, जासु दुहावन।
ए दुधवा के चलेला दहेंडिया त,
मठवा के नारी बहे।
ए हथवा के लिहली अरतिया त,
मुँह देखेली सोरही सनेही।
ए जहि रे जगवहु कवन देही, जासु दुहावन।
ए हथवा के लिहली अरतिया, त 
सोरही सनेही आरती निरेखेली ए। जाहिरे...

५.
आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मोरे अंगनवा हे,
देबऽ सतरजिया बिछाइ ए।
गाई के घीव धूम हूम कराइबि,
आकासे चली जास ए।
आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मोरे अंगनवा हे।
देबऽ सतरजिया बिछाई ए।
गाई के गोबर .. कब जग उगरिन होसु ए।
आईं ना काली माई, बइठीं मोरे अंगनवाँ हे,
देबऽ सतरजिया बिछाइ ए,
गाई के घीव धूम हम कराइबि,
कब जग उगरिन होसु हे।



पितर नेवतौनी

ये सरगऽ में बसेले बर्हम बाबाऽ, उन्हउ के नेवतबि।
ये सरगऽ में बसेले महादेव बाबाऽ, उन्हउ के नेवतबि।

इसी तरह ठाकुर बाबा, सुरुज, खिरलिच, काली, दुर्गा, चन्द्रमा, अछैबट सभी देवता एवं उनकी पत्नी देवी का और सभी कीड़ों-मकोड़ों का भी आवाहन किया जाता है।

दुआरी छेंकौनी गीत
छोड़ीं-छोड़ीं सखी सबे रोकल दुआर हे
मोर दुलहा बाड़े लड़िका नादान हे।
अहिरा के जात हंउअन बोली पतिशाह हे
कइसे में छोड़ीं सखी रोकल दुआर हे
तोर दुलहा बाड़े सखी लड़िका नादान हे।

दुल्हे का उत्तर
अहिरा के जात हईं बोली पतिशाह रे 
काहे के बाबा तोर गइले पूजन रे। 
काहे के भइया तोर गइले बोलावे रे।



विदाई का गीत 

१.

खेलत रहलीं सुपली मउनिया, आ गइले ससुरे न्यार।
बड़ा रे जतन से हम सिया जी के पोसलीं, सेहु रघुवर ले-ले जाय।
आपन भैया रहतन तऽ डोली लागल जइतन, बिनु भैया डोलिया उदास।
के मोरा साजथिन पौती पोटरिया, के मोरा देथिन धेनु गाय।
आमा मोरे साजथिन पावती पोटरिया, बाबाजी देतथिन धेनु गाय।
केकरा रोअला से गंगा नदी बहि गइलीं, केकरे जिअरा कठोर।
आमाजी के रोअला से गंगाजी बहि गइलीं, भउजी के जिअरा कठोर।
गोर परूँ पइयाँ परूँ अगिल कहरवा, तनिक एक डोलिया बिलमाव।
मिली लेहु मिली लेहु संग के सहेलिया, फिर नाहीं होई मुलाकात।
सखिया -सलेहरा से मिली नाहीं पवलीं, डोलिया में देलऽ धकिआय।
सैंया के तलैया हम नित उठ देखलीं, बाबा के तलैया छुटल जाय।

२.
राजा हिंवंचल गृहि गउरा जी जनमलीं, शिव लेहले अंगुरी धराय।
बसहा बयल पर डोली फनवले, बाघ छाल दिहलन ओढ़ाय।

3
बर रे जतन हम आस लगाओल, पोसल नेहा लगाय
सेहो धिया आब सासुर जैती, लोचन नीर बहाय

जखन धिया मोर कानय बैसथिन, सखी मुख पड़ल उदास
अपन सपथ देहि सखी के बोधल, डोलिया में दिहले चढाय. लोचन नीर बहाय...

गाम के पछिम एक ठूंठी रे पाकरिया, एक कटहर एक आम
गोर रंग देखि जुनी भुलिहा हो बाबा, श्यामल रंग भगवान. लोचन नीर बहाय...



फगुआ के गीत

१.
धनि-धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो। 
लिखि लिखि चिठिया नारद मुनि भेजे, विश्वामित्र पिठायो।
साजि बरात चले राजा दशरथ, 
जनकपुरी चलि आयो, राम वर पायो।
वनविरदा से बांस मंगायो, आनन माड़ो छवायो।
कंचन कलस धरतऽ बेदिअन परऽ,
जहाँ मानिक दीप जराए, राम वर पाए।
भए व्याह देव सब हरषत, सखि सब मंगल गाए,
राजा दशरथ द्रव्य लुटाए, राम वर पाए।
धनि -धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो।

२.
बारहमासा
शुभ कातिक सिर विचारी, तजो वनवारी।
जेठ मास तन तप्त अंग भावे नहीं सारी, तजो वनवारी।
बाढ़े विरह अषाढ़ देत अद्रा झंकारी, तजो वनवारी।
सावन सेज भयावन लागतऽ,
पिरतम बिनु बुन्द कटारी, तजो वनवारी।
भादो गगन गंभीर पीर अति हृदय मंझारी,
करि के क्वार करार सौत संग फंसे मुरारी, तजो वनवारी।
कातिव रास रचे मनमोहन,
द्विज पाव में पायल भारी, तजो वनवारी।
अगहन अपित अनेक विकल वृषभानु दुलारी,
पूस लगे तन जाड़ देत कुबजा को गारी।
आवत माघ बसंत जनावत, झूमर चौतार झमारी, तजो वनवारी।
फागुन उड़त गुलाब अर्गला कुमकुम जारी, 
नहिं भावत बिनु कंत चैत विरहा जल जारी,
दिन छुटकन वैसाख जनावत, ऐसे काम न करहु विहारी, तजो वनवारी।


बारहमासा 

प्रथम मास असाढि सखि हो, गरज गरज के सुनाय।
सामी के अईसन कठिन जियरा, मास असाढ नहि आय॥
सावन रिमझिम बुनवा बरिसे, पियवा भिजेला परदेस।
पिया पिया कहि रटेले कामिनि, जंगल बोलेला मोर॥
भादो रइनी भयावन सखि हो, चारु ओर बरसेला धार।
चकवी त चारु ओर मोर बोले दादुर सबद सुनाई॥
कुवार ए सखि कुँवर बिदेश गईले, तीनि निसान।
सीर सेनुर, नयन काजर, जोबन जी के काल॥
कातिक ए सखी कतकि लगतु है, सब सखि गंगा नहाय।
सब सखी पहिने पाट पीतम्बर, हम धनि लुगरी पुरान॥
अगहन ए सखी गवना करवले, तब सामी गईले परदेस।
जब से गईले सखि चिठियो ना भेजले,तनिको खबरियो ना लेस॥
पुस ए सखि फसे फुसारे गईले, हम धनि बानि अकेली। 
सुन मन्दिलबा रतियो ना बीते, कब दोनि होईहे बिहान॥
माघ ए सखि जाडा लगतु है, हरि बिनु जाडो न जाई।
हरि मोरा रहिते त गोद मे सोबइते, असर ना करिते जाड॥
फागुन ए सखि फगुआ मचतु है, सब सखि खेलत फाग।
खेलत होली लोग करेला बोली , दगधत सकल शरीर॥
चैत मास उदास सखि हो एहि मासे हरि मोरे जाई। 
हम अभागिनि कालिनि साँपिनि, अवेला समय बिताय॥
बइसाख ए सखि उखम लागे, तन मे से ढुरेला नीर॥
का कहोँ आहि जोगनिया के, हरिजी के राखे ले लोभाई॥
जेठ मास सखि लुक लागे सर सर चलेला समीर।
अबहुँ ना सामी घरवा गवटेला, ओकरा अंखियो ना नीर॥

रइनी - रात , कतिकि - कार्तिक के नहान , फुसारे - पानी बरसेला , फुहार पानी के , सोबइत - सुतावल , दगधत - जरत , लहकत , ढुरेला - गिरेला ( धीरे धीरे ) , गवटेला - लवटेला



देशभक्ति : बटोहिया

रचनाकार : रघुवीर नारायण

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से
मोरे प्राण बसे हिम-खोह रे बटोहिया
एक द्वार घेरे रामा हिम-कोतवलवा से
तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया

जाहु-जाहु भैया रे बटोही हिंद देखी आउ
जहवां कुहुंकी कोइली बोले रे बटोहिया
पवन सुगंध मंद अगर चंदनवां से
कामिनी बिरह-राग गावे रे बटोहिया

बिपिन अगम घन सघन बगन बीच
चंपक कुसुम रंग देबे रे बटोहिया
द्रुम बट पीपल कदंब नींब आम वॄ‌छ
केतकी गुलाब फूल फूले रे बटोहिया

तोता तुती बोले रामा बोले भेंगरजवा से
पपिहा के पी-पी जिया साले रे बटोहिया
सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से
मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया

गंगा रे जमुनवा के झिलमिल पनियां से
सरजू झमकी लहरावे रे बटोहिया
ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निसि दिन
सोनभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया

उपर अनेक नदी उमडी घुमडी नाचे
जुगन के जदुआ जगावे रे बटोहिया
आगरा प्रयाग काशी दिल्ली कलकतवा से
मोरे प्रान बसे सरजू तीर रे बटोहिया

जाउ-जाउ भैया रे बटोही हिंद देखी आउ
जहां ऋषि चारो बेद गावे रे बटोहिया
सीता के बीमल जस राम जस कॄष्ण जस
मोरे बाप-दादा के कहानी रे बटोहिया

ब्यास बालमीक ऋषि गौतम कपिलदेव
सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया
रामानुज-रामानंद न्यारी-प्यारी रूपकला
ब्रह्म सुख बन के भंवर रे बटोहिया

नानक कबीर गौर संकर श्रीरामकॄष्ण
अलख के गतिया बतावे रे बटोहिया
बिद्यापति कालीदास सूर जयदेव कवि
तुलसी के सरल कहानी रे बटोहिया

जाउ-जाउ भैया रे बटोही हिंद देखि आउ
जहां सुख झूले धान खेत रे बटोहिया
बुद्धदेव पॄथु बिक्रमा्रजुन सिवाजी के
फिरि-फिरि हिय सुध आवे रे बटोहिया

अपर प्रदेस देस सुभग सुघर बेस
मोरे हिंद जग के निचोड़ रे बटोहिया
सुंदर सुभूमि भैया भारत के भूमि जेही
जन 'रघुबीर. सिर नावे रे बटोहिया.

'बटोहिया' एक ऐसी रचना जो बिहार के प्रथम भोजपुरी राष्ट्रगीत का दर्जा पा चुकी कविता है.१९७० तक बिहार स्टेट टेक्स्ट बुक समिति द्वारा कक्षा १० और ११ की प्रकाशित हिंदी काव्य संग्रह के आवरण पृष्ठ पर 'बटोहिया' का मुद्रण अनवरत किया जाता था.गीत की कीर्ति सरहद पार मारीशस, त्रिनिदाद, फिजी, गुयाना तक थी. दुर्भाग्यवश बढ़ती उम्र के साथ बटोहिया की वह लोकप्रियता छिन गई.



निर्गुण : कवने खोतवा में लुक‍इलू आहि रे बालम चिरई 

कवने खोतवा में लुक‍इलू आहि रे बालम चिरई। 

आहि रे बालम चिरई, आहि रे बालम चिरई। 

बन-बन ढुँढली दर-दर ढुँढली ढुँढली नदी के तीरे
सांझ के ढुँढली रात के ढुँढली ढुँढली होत फजीरे
जन में ढुँढली मन में ढुँढली ढुँढली बीच बजारे
हिया-हिया में प‍इसि के ढुँढली ढुँढली विरह के मारे
कवने अँतरे में सम‍इलू आहि रे बालम चिरई
कवने खोतवा में लुक‍इलू आहि रे बालम चिरई।

गीत के हम हर कड़ी से पुछलीं पुछलीं राग मिलन से
छंद-छंद लय ताल से पुछलीं पुछलीं सुर के मन से
किरन-किरन से जाके पुछलीं पुछलीं नल गगन से
धरती और पाताल से पुछलीं पुछलीं मस्त पवन से
कवने सुगना पर लोभ‍इलू आहि रे बालम चिरई
कवने खोतवा में लुक‍इलू आहि रे बालम चिरई।

मंदिर से मस्जिद तक देखलीं, गिरिजा से गुरुद्वारा
गीता और कुरान में देखलीं, देखलीं तीरथ सारा
पंडित से मुल्ल तक देखलीं, देखली घरे कसाई
सगरी उमिरिया छछलत जियरा, कैसे तोहके पाईं
कवने बतिया पर कोहँइलू, आहि रे बालम चिरई
कवने खोतवा में लुक‍इलू आहि रे बालम चिरई।

सोहर 

अंगना में कुइयाँ खोनाइले, पीयर माटी नू ए

अंगना में कुइयाँ खोनाइले, पीयर माटी नू ए,
ए ललना जाहिरे जगवहु कवन देवा, नाती जनम लिहले हो।
नाती जनमले त भल भइले, अब वंस बाढ़हू ए।
ए ललना देह घालऽ सोने के हँसुअवा,
बाबू के नार काटहु ए।
ए ललना देइ घालऽ सोने के खपड़वा,
बाबू के नहवाईवि ए।
ए ललना जाहि रे जगवहु कवन देवा,
नाती जनम लिहले ए ।
नाती जनमले त भल भइले, अब वंस बाढ़हु ए ।
ए ललना देई घालऽ रेशमऽ के कपड़वा,
जे बाबू के पेनहाइवि ए ।

बबुआ बइठले नहाए त सासु निरेखेली ए
बबुआ बइठले नहाए त सासु निरेखेली ए,
ललना कवना चेली के लोभवलु त,
गरभ रहि जाले नू ए।
पुत मोरे बसेले अयोध्या, पतोहिया गजओबर ए,
ए सासु भंवरा सरीखे प्रभु अइले,
गरभ रहि जाले नू ए।
मोरे पिछुअरवा पटेहरवा भइया, तूहू मोरे हितवा नू ए,
बिनी द ना रेशमऽ के जलिया त,
छैला के भोराइवि हे।
बिनि देहले रेशमऽ के जलिया, रेशम-डोरिया लगाई देहले ए
लेहि जाहु रेशम के जलिया, छैला के भोरावऽहु ए ।
सुतल बाड़ू कि जागलऽ सासु,
चिन्ही लऽ आपनऽ पुतवा अछरंगवा मत लगावऽहु ए। (अछरंग=दोष)

जेठ बइसखवा के पुरइन लहर-लहर करे

जेठ बइसखवा के पुरइन लहर-लहर करे,
ताहि कोखी धिअवा जनमली त पुरुख बेपछ परले ए। (बेपछ=विपक्ष)
मइले ओढ़न, मइले डासन, कोदो चउरा पंथ भइले,
रेंडवा के जरेला पसंगिया, निनरियो नाहि आवेले ए।
लाले ओढ़न, लाल डासन, बसमती चउरा पंथ भइले,
चनन के जरेला पसंगिया, निनरिया बलु आवेले ए।
सासु के देबऽ रेडिय तेल, ननद के तिसिए तेल,
गोतिन के देबऽ फुलेल तेल, हम गोतिन पाइंच ए।
सासु जे आवेली गावत, ननद बजावत हे,
गोतिन आवेली बिसमाधम मुदइया मोरे जनमऽलन,
सासु के डासबऽ खटिअवा, ननद के मचिअवा नू ए।
गोतिन के लाली पलंगिया हम गोतिन पाइंचए

सोने के खरउआ राजा रामचन्द्र खुटुर-खुटुर चले नु ए

सोने के खरउआ राजा रामचन्द्र खुटुर-खुटुर चले नु ए।

चली गइले आमा के बोलावे-
चलहु ए आमा चलहु मोरा अंगना चलहु ए,
मोर धनि बेदने-बेआकुल झँझिरिया धइले लोटेली हे।
नाहीं जाइब ए बबुआ नाहीं जाइब, तहरा अँगनवाँ नाहीं जाइब हे,
तहरा धनि बोलेली बिरहिया, सहल नाहीं जाला नु ए।
चलहु ए मामी चलहु, मोरे अंगना चलहु हे
मोर धनि बेदने-बेआकुल झंझरिया धरी लोटेली हे।
नाहीं जाइब ए बबुआ नाहीं जाइब, तोर धनि बोलेली
बिरही कड़कवा, मोरे हिया लागेला हे।
महतारी, भाभी के बाद बहिन के पास गए और फिर अन्त में -
लोटहु ए धनि लोटहु झंझरिया धरी लोटहु ए।
आमा के बोलेलू बिरहिया सहल नाहीं जाला नु ए।
बहिन , भाभी... के बोलेलू बिरहिया सहल नाहीं जाला नु ए।
नउजी अइहें सासु, नउजी अइहें ननदो, नउजी अइहें गोतिन, नउजी अइहें हो (नउजी=चाहे न)
प्रभुजी ओढ़ि लेब ललका रजइया सउरिया हमी लिपबऽ नु ए। (ललका रजइया=कफन)
घरी रात बितले पहर रात, अउरी छने रात हे 
ललना अधेराती होरिला जनमले, महलिया उठे सोहर ए
मोरा पिछुअरवा बजनिया भैया, भैया धीरे-धीरे बजवा बजइह,
ननदवा जनि जानस हे।
ललना सुनि लहली लउरी ननदिया, बेसरिया हम बधइया लेब हे, (लउरी=छोटी)
सभवा बइठल बाबा बानी, सरब गुन आगर बानी हे, (बेसरिया=नकबेसर, नाक का एक आभूषण)
भउजो के भइले नन्दलाल, बेसरिया हम बधइया लेब हे।
उहवाँ से बाबा उठि आवे ले, अंगना में ठारा भइले हे 
बबुआ देइ घालऽ नाक के बेसरिया दुलारी धिअवा पाहुन हे। (फुफुतिया=फांड)
नाक में से कढ़ली बेसरिया फुफुतिया में चोरावेली हे
इहे बेसरिया हमके बाबा दहले, बधइया तोहके नाहीं देब हे।

जुग जुग जियसु ललनवा

जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो
ललना लाल होइहे, कुलवा के दीपक मनवा में आस लागल हो॥

आज के दिनवा सुहावन, रतिया लुभावन हो,
ललना दिदिया के होरिला जनमले, होरिलवा बडा सुन्दर हो॥

नकिया त हवे जैसे बाबुजी के,अंखिया ह माई के हो
ललन मुहवा ह चनवा सुरुजवा त सगरो अन्जोर भइले हो॥

सासु सुहागिन बड भागिन, अन धन लुटावेली हो
ललना दुअरा पे बाजेला बधइया, अन्गनवा उठे सोहर हो॥

नाची नाची गावेली बहिनिया, ललन के खेलावेली हो
ललना हंसी हंसी टिहुकी चलावेली, रस बरसावेली हो॥

जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो
ललना लाल होइहे, कुलवा के दीपक मनवा में आस लागल हो॥

मोरे पिछवरवा चन्दन गाछ आवरो से चन्दन हो

मोरे पिछवरवा चन्दन गाछ आवरो से चन्दन हो
रामा सुघर बडइया मारे छेवर लालन जी के पालन हो॥
रामा के गढउ खडउवा लालन जी के पालन हो,
रामा जसुमती ठाडी झुलावै लालन जी के पालन हो॥
झुलहु त लाल झुलाहु अवरो से झुलहु हो
रामा जमुना से जल भरि लाईं त झुलवा झुलाइब हो॥
जमुना पहुच न पावों घडिलवौ ना भरिलिउं हो
रामा पिछ्वा उलति जो मैं चितवुं पहल मुरली बाजल हो॥ 
रान परोसिन मैया मोरी अवरो बहिन मोरी हो
बहिनि छवहि दिना के भइने लाल त मुरली बजावल हो॥
चुप रहो जसुमति चुप रहो दुस्मन ज नी सुने हो
बहिनी ई हैं के कन्स के मारिहै औ गोकुला बसैहे हो॥

मिली जुली गावे के बधैया, बधैया गाव सोहर हो
मिली जुली गावे के बधइया, बधइया गाव सोहर हो
आज क्रिशन के होइहे जनमवा, जगत गाई सोहर हो॥
नन्द बाबा देवे धेनू गैया लुटावे धन यशोदा मैया हो
यहवा घर घर बाजता बधैया, महलिया उठे सोहर हो॥

छापक पेड़ छिउलिया, त पतवन धन बन हो

छापक पेड़ छिउलिया त पतवन धन बन हो
ताहि तर ठाढ़ हरिनवा त हरिनी से पूछेले हो
चरतहीं चरत हरिनवा त हरिनी से पूछेले हो
हरिनी! की तोर चरहा झुरान कि पानी बिनु मुरझेलू हो
नाहीं मोर चरहा झुरान ना पानी बिनु मुरझींले हो
हरिना आजु राजा के छठिहार तोहे मारि डरिहें हो
मचियहीं बइठली कोसिला रानी, हरिनी अरज करे हो
रानी! मसुआ तो सींझेला रसोइया खलरिया हमें दिहितू न हो
पेड़वा से टांगबी खलरिया त मनवा समुझाइबि हो
रानी हिरि-फिरि देखबि खलरिया जनुक हरिना जिअतहिं हो
जाहू! हरिनी घर अपना खलरिया ना देइबि हो
हरिनी खलरी के खंझड़ी मढ़ाइबि राम मोरा खेलिहें नू हो
जब-जब बाजेला खंजड़िया सबद सुनि अहंकेली हो
हरिनी ठाढ़ि ढेकुलिया के नीचे हरिन बिसूरेली हो

मचिया ही बईठल कौशिल्या रानी

मचिया ही बईठल कौशिल्या रानी, सिहाँसन राजा दशरथ हो
राजा बिनु रे बदरी कहीं कजरी कहाँ जाई बरसेले हो
बोलिया त बोलेली रानी बोलही नाहीं पावेली हो
रानी बीनू हो ग़रभ के तिरियवा होरीला नाही जनमत सुनत सुख सोहर हो
एतना बचन रानी सुनली सुनहि नाही पावेली हो
रानी हाथे गोड़े तानेली चदरिया सुतेली कोपवाघर हो (कोपभवन)
सोने के खडौउआ राजा दशरथ केकयी महल चले
रानी तोरे बहिना बड़े रे वियोगावा त चली के मनावहु हो
एक हाथ लेली केकयी दतुअनि दुसरे हाथ पानी हो
केकयी झटकि के चढ़ेली अटरिया त बहिना मनावन हो
उठहु इ बहिना उठहु कहल मोर मानहु
बहिना उठिके करहु दतुअनिया होरिल तोरे होईहे सुनीह सुख सोहर हो
कवनाहिं मासे गंगा बढ़ियईहें सवार दहे लगिहन हो
बहिनी कवनही मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
सावन मासे गंगा बढ़ियईहें सेवर दहे लगिहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमेलें त बचन पूरण भईलें
सब सखि तेल लगावेली मंगल गावेली
रानी केकयी के जीयरा भे रोग सुनीके नाहि आवेली
सोने के खड़उआँ राजा दशरथ केकयी महल चलें
रानी कवन अवगुन मोसे भईलें सुनीके नाहि आवेलू हो
ना हम तेल लगाईब ना ही मंगल गाईबी राजा हो
ब्रम्हा के बान्हल पिरितिया उलटी राउरे दिहली।

रुकुमिनी लिपी अईली पोति अईली

रुकुमिनी लिपी अईली पोति अईली छतीस दियना बारि अईली हो
आरे बीनू रे होरील के ओबरिया त झहर झहर करे
एक रे पहर रुकुमिनी सूतेली सपन एक देखेली हो
आरे पांचही आम के घवदिया खोईन्छा कहू डालेला
दूसरा पहर रुकुमिनी सूतली त सपन एक देखेली हो
आरे कोरी नदीयवा के दहिया जंगलवा कहू धईल
तीसरा पहर रुकुमिनी सूतेली सपन एक देखेली
आरे लाल बरन के घुनघुनावान सेजीयावा पर धईल.
चौथा पहर रुकुमिनी सूतेली सपन एक देखेली हो
आरे सावरेन वरन के होरीलवा सेजीयवा पर खेलेला हो

अपने ओसरवां कोशिल्या रानी राम के उलारेली

अपने ओसरवां कोशिल्या रानी राम के उलारेली राम के दुलारेली हो
आरे उलटी उलटी राम के देखेली देखत नीक लागेला
भीखिया मांगत दुई ब्राह्मण रानी से अरज करें
रानी कवन कवन तप कईलू त राम गोदी बिहसेले
माघ ही मॉस नहईलीं अगिनी नाही तपली हो
ए ब्राह्मन जेठ नाही बेनिया दोलावली त राम गोद बिहसेलें हो
कातिक मॉस नहईलीं तुलसी दियना बरीलें हो
ए ब्राह्मन कातिक में आवलाँ के दान कईलीं त राम गोदी बिहसेलें हो
भूखल रहलीं एकादशी त द्वादशी के पारण करीं
ए ब्राह्मण भूखले में विप्र के जेववलीन त राम गोद बिहसेलें हो



[श्रेणी : भोजपुरी लोकगीत। रचनाकार : अज्ञात]