'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

हम हैं ताना-हम हैं बाना / उदय प्रकाश

हम हैं ताना, हम हैं बाना । 
हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना 

नाद हमीं, अनुनाद हमीं, निःशब्द हमी गंभीरा, 
अंधकार हम, चाँद सूरज हम, हम कान्हा हम मीरा । 
हमीं अकेले, हमी दुकेले, हम चुग्गा, हम दाना ।।
मंदिर-महजिद, हम गुरुद्वारा, हम मठ, हम बैरागी
हमीं पुजारी, हमीं देवता, हम कीर्तन, हम रागी । 
आखत-रोली, अलख-भमूती, रूप धरे हम नाना ।।
मूल-फूल हम, रुत बादल हम, हम माटी, हम पानी 
हमीं जहूदी-शेख-बरहमन, हरिजन हम ख्रिस्तानी । 
पीर-अघोरी, सिद्ध-ओलिया, हमी पेट, हम खाना ।। 
नाम-पता, ना ठौर-ठिकाना, जात-धरम ना कोई 
मुलक-ख़लक, राजा-परजा हम, हम बेलन, हम लोई । 
हमही दुलहा, हमीं बराता, हम फूँका, हम छाना ।।

[ श्रेणी : कविता । उदयप्रकाश ]