'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

नहीं आने के लिए कहकर / एकांत श्रीवास्तव

नहीं आने के लिए कह कर जाऊंगा
और फिर आ जाऊंगा

पवन से, पानी से, पहाड़ से
कहूंगा-- नहीं आऊंगा
दोस्तों से कहूंगा और ऎसे हाथ मिलाऊंगा
जैसे आख़िरी बार
कविता से कहूंगा-- विदा
और उसका शब्द बन जाऊंगा
आकाश से कहूंगा और मेघ बन जाऊंगा
तारा टूटकर नहीं जुड़ता
मैं जुड़ जाऊंगा
फूल मुरझा कर नहीं खिलता
मैं खिल जाऊंगा

हर समय 'दुखता रहता है यह जो जीवन'
हर समय टूटता रहता है यह जो मन
अपने ही मन से
जीवन से
संसार से
रूठ कर दूर चला जाऊंगा
नहीं आने के लिए कहकर

और फिर आ जाऊंगा ।

[ श्रेणी : कविता। एकांत श्रीवास्तव ]