'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

हमन है इश्क मस्ताना / कबीर


हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ?

रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ? 


जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते,

हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ? 


खलक सब नाम अनपे को, बहुत कर सिर पटकता है,

हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ? 


न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से,

उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ? 


कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से,

जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?

[ श्रेणी : कविता । कबीर ]