'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

एक अकेले का गाना / उदय प्रकाश

धन्य प्रिया तुम जागीं, 
ना जाने दुख भरी रैन में कब तेरी अंखियां लागीं। 

जीवन नदिया, बैरी केवट, पार न कोई अपना 
घाट पराया, देस बिराना, हाट-बाट सब सपना । 
क्या मन की, क्या तन की, किहनी अपनी अंसुअन पागी । 

दाना-पानी, ठौर ठिकाना, कहां बसेरा अपना 
निस दिन चलना, पल-पल जलना, नींद भई इक छलना । 
पाखी रूंख न पाएं, अंखियां बरस-बरस की जागी । 

प्रेम न सांचा, शपथ न सांचा, सांच न संग हमारा 
एक सांस का जीवन सारा, बिरथा का चौबारा । 
जीवन के इस पल फिर तुम क्यों जनम-जनम की लागीं । 

धन्य प्रिया तुम जागीं, 
ना जाने दुख भरी रैन में कब तेरी अंखियां लागीं ।

[ श्रेणी : कविता । उदयप्रकाश ]