'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

बकरियाँ / आलोक धन्वा

अगर अनंत में झाडियाँ होतीं तो बकरियाँ 
अनंत में भी हो आतीं 
भर पेट पत्तियाँ तूंग कर वहाँ से 
फिर धरती के किसी परिचित बरामदे में 
लौट आतीं 

जब मैं पहली बार पहाड़ों में गया 
पहाड़ की तीखी चढाई पर भी बकरियों से मुलाक़ात हुई 
वे काफ़ी नीचे के गाँवों से चढ़ती हुई ऊपर आ जाती थीं 
जैसे जैसे हरियाली नीचे से उजड़ती जाती 
गर्मियों में 

लेकिन चरवाहे कहीँ नहीं दिखे 
सो रहे होंगे 
किसी पीपल की छाया में 
यह सुख उन्हें ही नसीब है।

[ श्रेणी :कविता  । आलोक धन्वा ]