'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

दण्डकारण्य में माँ / विजय राठौर

दण्डकारण्य के सुदूर वनांचल में
बसती है माँ दन्तेश्वरी

आजानुबाहु राजा के
पुरखों के संचित पुण्यों से,
साक्षात वरदायिनी माँ की ममता से
अब भी अभिभूत हैं जंगल के चराचर

अपनी न्यूनतम ज़रूरतों के बीच
सल्फ़ी के कुछ घूँट
और कोदों के कुछ दानों से लोग
अब भी बुझाते हैं अपनी प्यास और भूख

पृथ्वी ने उन्हें दे रखी है
हज़ारों नियामतें
सागौन, साल और महुए के साए में
अब भी वे रहते हैं आदमी की तरह

पाशविकता के इस कारुणिक मौसम में
माँ दंतेश्वरी की कृपा से।

[ संकलन : माँ । विजय राठौर ]