'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

माँ हमारी सदानीरा / कुमार रवींद्र

कुमार रवींद्र
माँ हमारी सदानीरा नदी जैसी
महक है वह
फूल वन की
सघन मीठी छाँव जैसी

घने कोहरे में
सुनहरी रोशनी के
ठाँव जैसी
नेह का अमरित पिलाती
माँ हमारी है गंभीरा नदी जैसी

सुबह मिलती
धूप बन कर
शाम कोमल छाँव हो कर
रात भर
रहती अकेली
वह अंधेरों के तटों पर
और रहती सदा हँसती
माँ हमारी महाधीरा नदी जैसी

एक मंदिर
ढाई आखर का
उसी की आरती वह
रोज़ नहला
नेहजल से
हम सभी को तारती वह
हर तरफ़ विस्तार उसका
माँ हमारी सिंधुतीरा नदी जैसी

[ संकलन : माँ । कुमार रवींद्र ]