'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

दरवाज़ा / अनामिका

मैं एक दरवाज़ा थी 
मुझे जितना पीटा गया 
मैं उतना ही खुलती गई। 

अंदर आए आने वाले तो देखा– 
चल रहा है एक वृहत्चक्र– 
चक्की रुकती है तो चरखा चलता है 
चरखा रुकता है तो चलती है कैंची-सुई 
गरज यह कि चलता ही रहता है 
अनवरत कुछ-कुछ ! 

... और अन्त में सब पर चल जाती है झाड़ू 
तारे बुहारती हुई 
बुहारती हुई पहाड़, वृक्ष, पत्थर– 
सृष्टि के सब टूटे-बिखरे कतरे जो 
एक टोकरी में जमा करती जाती है 
मन की दुछत्ती पर।

[ श्रेणी :कविता  । अनामिका ]