'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

धरती माँ के बच्चे / रमेश कौशिक

रमेश कौशिक
ये जो देख रहो हो
तुम फूलों के गुच्छे
ये भी हैं तुम जैसे
धरती माँ के बच्चे।

इन्हें देखकर मधुर
गीत, पंछी गाते हैं
थकी हुई आँखों में
सपने तिर जाते हैं।

उजली रातों में ये
लगते नभ के तारे
दिन में इंद्रधनुष-से
मोहक प्यारे-प्यारे।

जब तक ये हैं,तब तक
भू पर सुंदरता है
भोली-भाली परियों
की-सी कोमलता है।

पौधों की डालों पर
इनको मुसकाने दो,
दुनिया के आँगन में
ख़ुशबू भर जाने दो।

[ संकलन : माँ । रमेश कौशिक ]