'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

माँ / अवनीश सिंह चौहान

घर की दुनिया माँ होती है
खुशियों की क्रीम 
परसने को
दुःखों का दही बिलोती है

पूरे अनुभव एक तरफ हैं
मइया के अनुभव के आगे
जब भी उसके पास गए हम
लगा अँधेरे में हम जागे

अपने मन की 

परती भू पर
शबनम आशा की बोती है
घर की दुनिया माँ होती है

उसके हाथ का रूखा-सूखा-
भी हो जाता है काजू-सा
कम शब्दों में खुल जाती वह
ज्यों संस्कृति की हो मंजूषा

हाथ पिता का 

खाली हो तो
छिपी पोटली का मोती है
घर की दुनिया माँ होती है


[ संकलन : माँ । अवनीश सिंह चौहान ]