'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

आम आदमी / अश्वघोष

व्यर्थ जा रही सारी अटकल
कितना बेबस, कितना बेकल
आम आदमी ।

मन में लेकर सपनों का घर
खड़ा हुआ है चौराहे पर
चारों ओर बिछी है दलदल
कैसे खोजे राहत के पल
आम आदमी ।

तन में थकन नसों में पारा
कंधों पर परिवार है सारा
कहाँ जा रहा मेहनत का फल ?
सोच-सोच कर होता दुर्बल
आम आदमी ।

उखड़ी-उखड़ी साँस ले रहा
संसद को आवाज़ दे रहा
मीलों तक पसरा है छल-बल
बार-बार होता है निष्फल
आम आदमी ।

[ श्रेणी : कविता । अश्वघोष ]