'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

साठ पार के माँ-बाबूजी / अभिज्ञात

अभिज्ञात
जैसे कि एक की साँस का होना
दूसरे के लिए बेहद ज़रूरी है

एक जो पहले सोता है
लेता है खर्राटे ज़ोर-ज़ोर से

और दूसरे जागता रहता है उसके सहारे, 

उसकी डोर थामे

उसके लिए यह साँसों की आवाज़ 
एक आश्वासन है
जीने की लय
जीने का जरिया और मतलब
जीने की वज़ह

एक का खर्राटा बचाता है 
दूसरे को अकेला होने से

कभी-कभी लगता है खर्राटे लेने वाला 

करता रहता है दूसरे की साँस की रखवाली।

[ संकलन : माँ । अभिज्ञात ]