'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

चुने हुए हिमाचली लोकगीत

  • धोबण / हिमाचली
  • भरियाँ बंदूकां / हिमाचली
  • हुंण वो कतायें जो नसदा वो धुडुआ / हिमाचली

धोबण 

काला घगरा सियाई के, 
ओ धोबण पाणीये जो चल्ली है मैं तेरी सो. णा
मत जांदी धोबणे तू मेरिये ओथु राजेयाँ डा डेरा है मैं तेरी सो.
धोबणे घड़ा सिरे चुकया धोबण पानीये जो गयी है मैं तेरी सो.
पहलिया पोडिया उत्तरी, राजे गिट्टूये दी मारी है मैं तेरी सो.
दूजिया पोडिया उत्तरी ओ राजें बांह फड लई है मैं तेरी सो
छड़ी देयां राजेंया बाईं जो, ओ मेरी जात कमीनी है मैं तेरी सो.
जाती दा मैं क्या करना ओ तेरी सूरत बड़ी सोणी है मैं तेरी सो.
आगे आगे राजा चल्या पीछे धोबणी दा डोला है मैं तेरी सो.
खबर करो महलां रानिया तेरी सोतन भी आई है मैं तेरी सो.
आई है ता ओणा दे मैं भी बसणा दी है मैं तेरी सो
अपु बैठी रानी पलगें धोबण पन्दी पर बिठाई है मैं तेरी सो.
कालियां पिन्नियां बणाइयां बिच जहर मिलाया है मैं तेरी सो.
खाई लेयां धोबणे तू पिन्नियां' बाजी प्योकियाँ ते आई है मैं तेरी सो.
पहली पीनी खायी है धोबणी ओ धोबण मूंदे मुन्हे पयी है मैं तेरी सो.
दूजी पिन्नी खायी है धोबणी, धोबण मरी मुक्की गयी है मैं तेरी सो.
चन्नणे दी सेज बनाई के धोबण नदिया रड़ाई है मैं तेरी सो.
आगे धोभी कपडेयां धोम्दा' पासे सेज रूडदी आई है मैं तेरी सो.
सेज गुआडी करी दिखया मेरी धोबन रूडदी आई है मैं तेरी सो.
सोनी सूरत वालिये कजो जान गुआई है मैं तेरी सो।


भरियाँ बंदूकां 

भरियाँ बंदूकां राजा होया तैयार

मारी जे लैणा सैले बागे दा मोर
न तुसां मारे ओ राजा चिड़ियाँ तोते
न तुसां मारे ओ सैले बागे दा मोर
क्या ता लगदे ओ राणी चिड़ियाँ तोते
क्या ता लगदा सैले बागे दा मोर
सासु दे जाये राजा चिड़ियाँ तोते
अम्मा दा जाया सैले बागे दा मोर
भारियां बंदूकां राजें खेल्या शकार
मारी जे ल्यंदा सैले बागे दा मोर
उठो जी राणी करयो रसो
अव्वल बनायो सैले बागे दा मोर
बखिया भी पेड सिरे भी पेड
मेते नी बंणदा सैले बागे दा मोर
उठो जी राणी तुसां खाई लो रसो
छैल बणाया सैले बागे दा मोर
उत्त्चे ते छड़ी की रानिये दीती है छाल
जान गुआणी ओ वीरा तेरे ही नाल


हुंण वो कतायें जो नसदा वो धुडुआ 

हुंण वो कतायें जो नसदा वो धुडुआ
बापुएं लडें तेरे ओ लायी

रिडिया ता रिडिया धुडू भला नसदा
नालें ता खोलें गौरां तोपदी

कजो वो कुआरी बाबुल दे घरें
अज वो ब्याइयाँ कजो भला छोडदा

गौरां ता गोरां हक्कां वो लाइयाँ ळ
गोरां ता हक्का ना वो सुनदी

मगरियां चालीं चल मेरे धुडुआ
नाजुक पैरां छाले ओ आये

छन्द छन्द धुडुआ भाली ओ लयां
नाजुक लत्ता ना चलदी

मलिया रा कूड़ा मलिया सुटना
ना तेरी धीयाँ ना तेरी जोतनी

असं भला होंदे मलिया रे जोगी
तू ता हुंदी राजे दे बेटी

उचेयाँ कैलाशा शिव मेरा बसदा
कुन वो ग्लांदा गौरां नी बसदा

हुंण वो कतायें जो नसदा वो धुडुआ
बापुएं लडें तेरे ओ लायी


[ श्रेणी : हिमाचली लोकगीत। रचनाकार : अज्ञात ]