'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

चुने हुए मालवी लोकगीत

  • गोया तो वचली पीपली रे / मालवी
  • रलियो मांडपड़ो सुवावणो जी / मालवी
  • बाजो अंग्रेजी चइए / मालवी
  • डुपट्टो फूलाँ भया / मालवी
  • म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी / मालवी
  • बेन्या बाई आरती जी / मालवी
  • चालो गजानंद (विवाह गीत) / मालवी
  • सांटो रे / मालवी

गोया तो वचली पीपली रे 

गोया तो वचली या पीपल रे वीरा जाँ चड़ जोउँ थारी वाट
माड़ी जाया चूनड़ लाया गोया तो वचली पीपल रे वीरा...

लावो तो सगला सारू लावजो रे वीरा नी तो रे रीजो हमारा देस
जामण जाया चूनड़ लावो।

संपत होय ओ आवजो रे वीरा नी तो रे रीजो तमारे देस
जामण जाया चूनड़ लावो।

संपत थोड़ो रे रिण घणो वो बेन्या पचाँ में राखूँ थारी सोब
जामण जाया चूनड़ लावो।

काँकड़ वचली या पीपली रे वीरा जाँ चड़ जोउँ थारी वाट
माड़ो जाया चूनड़ लावो।

लावो तो सगला सारू लावजो रे वीरा नी तो रे रीजो तमारे देस
जामण जाया ।

संपत थोड़ो ने रिण घणो वो बाई पचाँ में राखूँ थारी सोब
माड़ी जाई चूनड़ लावाँ।


रलियो मांडपड़ो सुवावणो जी

जी ओ पेलो यो खंब मोती भर्योजी जी ओ दूसरो
यो खंब हीरा भर्योजी जी ओ रचो म्हारे मांडप हेट
आज रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी।

जीओ तीसरो यो खंब चोखा भर्योजी जी ओ
चोथो यो खंब कंकु भर्योजी रचो म्हारा
मांडपड़ा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी।

जीओ पांचमो यो खंब सुपारी भर्योजी
जीओ छटो यो खंब नारेलाँ भर्योजी
जीओ रचो म्हारा मांडवा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी।

जीओ सातमो यो खंब हलदी भर्योजी
जीओ आठमो यो खंब लोगाँ भर्योजी
जीओ रचो म्हारा मांडवा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी।

जीओ नवमो यो खंब डोड़ा भर्योजी
जीओ रचो म्हारा मांडवा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी।


बाजो अंग्रेजी चइए 

चीरा तो तम पेरो बनाजी पेंचा भोत हजाब

बनाजी थारी बनड़ी हे नादान के बाजो अंग्रेजी चइए।

बाजो अंग्रेजी चइए के पंखी खसखस को चइए
झालर मखमल की चइए गोटा बंबई का चइए।

डांडी सोना की चइए हो जी थारी बनड़ी हे नादान 
के बाजो अंग्रेजी चइए ।

बना म्हारा जामा तो तम पेरो के बाजो अंग्रेजी चइए।

(इसी तरह से जेवरों के नाम जोड़ते-जोड़ते यह गीत लम्बा होता चला जाता है।)


डुपट्टो फूलाँ भया 

चीरा तो तम पेरजो रे बना पेंचा भोत हजार
डुपट्टो फूलाँ भर्यो लाला भोत हजार डुपट्टो फूलाँ भर्यो।

फूलाँ से भरियो सेवरो रे बना हीरा जड्यो रे जड़ाव
डुपट्टो फूलाँ भर्यो।

धारो झरोका को झाकणो रे बना म्हारो सरमीलो सुभाव
डुपट्टो फूलाँ का भर्यो।

थारे म्हारे झगड़ो लागसी रे बना सुनी हे माता बईरी सीख
डुपट्टो फूलाँ भर्यो थारे म्हारे झगड़ा लागसी रे
बना लागा हो बेन्या बेईरी सीख डुपट्टो फूलाँ भर्यो।

कंठी हो तम पेरजो रे बनाँ जामा भोत हजार
केसर भोत हजार डुपट्टो फूलाँ भर्यो।

कड़ा तो तम पेरजो रे बना हीरा भोत हजार
थारो झरोका को झाकणो रे बना म्हारो सरमीला सुभाव
डुपट्टो फूलाँ भर्यो।

(इसी तरह जेवरों और परिवार के सदस्यों के नाम जोड़ते-जोड़ते यह गीत लम्बा होता चला जाता है।)


म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी

वररा दादाजी वीणे फूल हो म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी...
वररा काकाजी वीणे फूल हो म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी...

गुँथी लावो म्हारी मालण स्याम सेवरो ओर
भली चंपे की कलियाँ गुंजामें गुंजो लाल जमेरी
ओरज मीठी दाखड़ली सेजा में मीठा गरी गीडोला।

वररा वीराजी वीणे फूल हो म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी...
वररा मामाजी वीणे फूल हो म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी...

गुँथी लावो म्हारी मालण स्याम सेवरो ओर भली
भली चंपे की कलियाँ गुंजा में गुंजो लाल जमेरी
ओरज मीठी दाखड़ली सेजा में मीठा गरी गींडोला।

वररा फूफा वररा जीजाजी वीणे फूल हो म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी...
वररा मासाजी वीणे फूल हो म्हारा राइवर जोगो सेवरोजी...

(इसी तरह परिवार के विभिन्न रिश्तेदारों के नाम जोड़ते-जोड़ते गीत लम्बा होता चला जाता है।)


बेन्या बाई आरती जी

राइवर उबा राइवर उबा हे मांडप आय तम करो वो
बेन्या बाई आरती जी।

बईरी सासु बईरी सासु नणद पूछे बात
ववड़ कोई ओ लादो आरती जी।

घोड़ला लादा घोड़ला लादा मांडपड़ा रे हेट
म्हारे मोरा ओ लादी डेड़सो जी घोड़ाला लादा
घोड़ला मांडपड़ा रे हेट म्हारे मोरा हो लादी डेड़ सो जी।

वकड झूटा ववड़ झूटा ओ झूटा रा बोल्या
थारी एक टकारी आरती जी।

राइवर उबा राइवर उबा मांडपड़ा रे हेट
तम करो वो बेन्या बाई करो वो सुमन बाई करो
वो मनीसा बाई करो वो टुइया बाई आरती जी।


चालो गजानंद (विवाह गीत)

चालो गजानंद जोसी क्याँ चालाँ
चालो गजानंद बजाजी क्याँ चालाँ
कई आछा-आछा लगनाँ लिखावाँ गजानंद
कोटारी गाद्धी पे नोबत बाजे।

नोबत बाजे इंदर गड़ गाजे
नोबत बाजे इंदर गड़ गाजे
तो झीणी-झीणी झालर बाजे गजानंद
कोटारी गादी पे नोबत बाजे।

चालो गाजानंद सोनी क्याँ चालाँ
चालो गजानंद माली क्याँ चालाँ
तो आछा-आछा गेणा मोलवाँ गजानंद
तो आछा-आछा सेवरा मोलावाँ गजानंद 
कोटारी गादी पे नोबत बाजे।

(इसी तरह शादी में दूल्हा-दुल्हन से जुड़ी चिज़ों के नाम लेते-लेते यह गीत लम्बा होता चला जाता है।)


सांटो रे 

जो रे कीका थने कड़ा खंगाली चावे
जो रे कीका थने कड़ा खंगाली चावे

नानाजी री गोद्याँ खेल रे हालरीया सांटो रे
कीका गूँज गली को भावे।

तो नानीजी री गोद्याँ खेल रे हालरीया सांटो रे
कीका गूँज गली को भावे।

जा रे कीका थने झगल्यो टोपी चावे
जा रे कीका थने रजई गादी चावे तो

मामाजी री मामीजी री गोद्याँ खेल रे हालरीया
सांटो रे कीका गूँज गली को भावे।

जो रे कीका चावे रेसम डोरी पालणो
तो भुवाजी री गोद्याँ खेल रे हालरीया
सांटो रे कीका गूँज... गली को भावे।

(बच्चों की ज़रूरत वाली चीज़ों के नाम जोड़ते-जोड़ते यह गीत लम्बा होता चला जाता है।)


[ श्रेणी : मालवी लोकगीत। रचनाकार : अज्ञात ]