'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

अधपके अमरूद की तरह पृथ्वी / अशोक वाजपेयी

खरगोश अँधेरे में 
धीरे-धीरे कुतर रहे हैं पृथ्वी ।

पृथ्वी को ढोकर
धीरे-धीरे ले जा रही हैं चींटियाँ । 

अपने डंक पर साधे हुए पृथ्वी को 
आगे बढ़ते जा रहे हैं बिच्छू । 

एक अधपके अमरूद की तरह 
तोड़कर पृथ्वी को 
हाथ में लिये है
मेरी बेटी । 

अँधेरे और उजाले में 
सदियों से 
अपना ठौर खोज रही है पृथ्वी

[ श्रेणी : कविता । अशोक वाजपेयी ]