'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

समय से अनुरोध / अशोक वाजपेयी

समय, मुझे सिखाओ
कैसे भर जाता है घाव?-पर 
एक अदृश्य फाँस दुखती रहती है
जीवन-भर|

समय, मुझे बताओ
कैसे जब सब भूल चुके होंगे
रोज़मर्रा के जीवन-व्यापार में
मैं याद रख सकूँ
और दूसरों से बेहतर न महसूस करूँ|

समय, मुझे सुझाओ
कैसे मैं अपनी रोशनी बचाए रखूँ 
तेल चुक जाने के बाद भी 
ताकि वह लड़का 
उधार लाई महँगी किताब एक रात में ही पूरी पढ़ सके|

समय, मुझे सुनाओ वह कहानी 
जब व्यर्थ पड़ चुके हों शब्द,
अस्वीकार किया जा चुका हो सच,
और बाक़ि न बची हो जूझने की शक्ति
तब भी किसी ने छोड़ा न हो प्रेम,
तजी न हो आसक्ति,
झुठलाया न हो अपना मोह|

समय, सुनाओ उसकी गाथा
जो अन्त तक बिना झुके
बिना गिड़गिड़ाए या लड़खड़ाए,
बिना थके और हारे, बिना संगी-साथी,
बिना अपनी यातना को सबके लिए गाए,
अपने अन्त की ओर चला गया|

समय, अँधेरे में हाथ थामने,
सुनसान में गुनगुनाहट भरने, 
सहारा देने, धीरज बँधाने 
अडिग रहने, साथ चलने और लड़ने का
कोई भूला-बिसरा पुराना गीत तुम्हें याद हो 
तो समय, गाओ
ताकि यह समय,
यह अँधेरा,
यह भारी असह्य समय कटे!

[ श्रेणी : कविता । अशोक वाजपेयी ]