'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

विगत / कीर्ति चौधरी

यही तो था
जिसे चाहा था
सदा दूसरों के पास देख
मन में सराहा था
’अरे हमारे पास भी यदि होता
तो यह जीवन क्या सँकरी गलियों में
बे हिसाब खोता?
हम भी चलते
उस प्रशस्त राज-पथ पर
बढ़ने वालों के क़दमों से क़दम मिला
बोझे को फूल-सा समझते
हम भी चलते
गर्व से सर ऊँचा किए।

पर जो बीत गए हैं कठिन अभावों के क्षण
कहीं वहीं तो नहीं रह गया
वह सरल महत्त्वाकांक्षी मन
आह ! उसके बिना तो सब अहूरा है
वह हर सपना
जो हुआ पूरा है !

[ श्रेणी : कविता । कीर्ति चौधरी ]