'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

तुझसे नेह लगाया / कीर्ति चौधरी

क्या पाया
तुझ से जो नेह लगाया
सुख-दु:ख सब कह डाला
मन में कोई भेद न पाला
क्या पाया पर
खड़ा रह गया हाथ पसारे
झूठे होकर मंद पड़े
वे उज्जवल तारे प्रेम-प्रीति के

आह ! देह का धर्म अकेला मैं ही झेलूँ?

यह कैसी दूरी
केसी मेरी मज़बूरी
देख रहा हूँ
छू सकता हूँ
आँखों ही आँखों तुझ को पी सकता हूँ
सुख पाता हूँ

उठा हाथ से दु:ख क्यों तुझको बाँट न पाया
मुझे नियति ने क्यों इतना असहाय बनाया
क्या पाया यदि मैंने तुझ से नेह लगाया?

तू भी किसी डाल पर होता खिले फूल-सा
तू भी सकला जाता माथा
गंध बसे मलयानिल के चंचल दुकूल-सा
क्यों मैंने तुझसे प्रत्याशा ही की होती?

संग-संग कितने दिवस बिताए
सुख-दु:ख के अनगिनती चित्र बनाए रंग-रंग
आह ! दु:ख की एक मार ने
सब बिसराया

क्या पाया, यदि मैंने तुझसे नेह लगाया ?


[ श्रेणी : कविता । कीर्ति चौधरी ]