'भाषान्तर' पर आपका हार्दिक स्वागत है । रचनाएँ भेजने के लिए ईमेल - bhaashaantar@gmail.com या bhashantar.org@gmail.com । ...समाचार : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैज़ाबाद) को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान। हिन्दी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार। भाषान्तर की हार्दिक बधाई और अनन्त शुभकामनाएँ।

तू / एरिष फ़्रीड

जहाँ कोई आजादी नहीं
वहाँ तू आजादी है,
जहाँ कोई गरिमा नहीं
वहाँ तू गरिमा है,
जहाँ कोई गर्माहट नहीं
आदमी आदमी के बीच कोई निकटता नहीं
तू निकटता और गरमी है,
बेरहम दुनिया का दिल है तू।

तेरे होंठ और तेरी जीभ
सवाल और ज़वाब हैं
तेरी बाहों और तेरी गोद में
शान्ति जैसा कुछ है
हर किसी को तुझसे आगे जाना है
जा रहा है वापस आने के लिए
तू भविष्य की शुरूआत है
बेरहम दुनिया का दिल है तू।

तू धर्मसिद्धांत नहीं
और दर्शन भी नहीं तू
तू कोई प्रभुता और संपत्ति नहीं
जिसे कोई जकड ले
तू एक जीवित व्यक्ति है
तू एक स्त्री है
तू भूल कर सकती है,
शक कर सकती है और तू दक्ष हो सकती है
बेरहम दुनिया का दिल है तू।


[ श्रेणी : अनूदित कविता । एरिश फ्रीड। अनुवादक : प्रतिभा उपाध्याय ]